विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत, ब्रिटेन और अमरीका समेत करीब दुनिया के 186 देशों में कोरोना वायरस 'COVID-19' अपने पैर पसार चुका है। सभी देशों की सरकार इस महामारी से निपटने के लिए अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रही है। लोगों से समाजिक दूरी बनाने की अपील की जा रही है। देश विदेश के कई शहर लॉकडाउन कर दिए गए हैं। वहीं खबर लिखे जाने तक दुनिया भर में करीब तीन लाख अस्सी हजार से ज्यादा लोग COVID-19 से संक्रमित हैं। इस वायरस से मरने वालों की संख्या 16,500 के पार पहुंच गई है।
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों पर किए गए अध्ययन के मुताबिक इस वायरस की वजह से 2.8 प्रतिशत पुरुषों और 1.7 प्रतिशत महिलाओं की मौत हुई है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले कम है लेकिन ये महिलाएं वो हैं जो गर्भवती नहीं हैं।
अब सवाल ये उठता है कि क्या गर्भवती महिलाओं पर कोरोना का प्रकोप हो सकता है तो इसका जवाब हां है। अमेरिकी सरकार ने सोमवार को यह घोषणा की है कि गर्भवती महिलाओं में कोरोना वायरस (COVID-19) का खतरा ज्यादा है। इसकी एक वजह ये हो सकती है कि प्रेग्नेंसी में महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर होती है। ऐसे में कोविड-19 इन महिलाओं पर तेजी से प्रहार कर सकता है। गर्भावस्था में शरीर में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इसे कुछ इस तरह से समझा जा सकता है, समान उम्र की दो महिलाओं में गर्भवती महिला की फ्लू या वायरस से मौत होने की आशंका ज्यादा हो सकती है।
अमेरिकी सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को COVID-19 को लेकर खास चिंता करने की जरूरत है क्योंकि यह वायरस फेफड़ों और सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करता है। एक संवाददाता सम्मेलन में सार्वजनिक स्वास्थ्य इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी क्रिस व्हिट्टी ने कहा कि "उच्च जोखिम" श्रेणी के लोगों को कम से कम 12 सप्ताह तक घर पर ही रहना चाहिए। इस श्रेणी में गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।