विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के पास भारत और चीन के सैन्य कमांडरों तथा विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच चल रही वार्ता को लेकर खास जवाब नहीं था। भारत और चीन के बीच सैन्य अधिकारियों और वर्किंग ग्रुप की लद्दाख को लेकर सातवें दौर की वार्ता के बाद भी अभी तनाव जस का तस है। कूटनीति के जानकारों के अनुसार आठवें दौर की वार्ता में भी विवाद का समाधान निकलने की कोई खास उम्मीद नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चीन इस मामले के समाधान में अमेरिकी चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहा है?
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार का कहना है कि इस तरह की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि रंजीत कुमार कहना है कि अमेरिका, चीन के साथ ट्रेड वार को संतुलित करेगा, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में ट्रीप की ही नीति जारी रहेगी। जो बाइडन ने भी इसी का समर्थन किया है। वायुसेना के पूर्व अधिकारी वाइस एयर मार्शल एनबी सिंह के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप के समय में चीन और अमेरिका के रिश्ते बहुत तल्ख रहे हैं। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति ट्रंप का प्रेम किसी से नहीं छिपा है।
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने भारत को साथ देने का भरोसा दिलाया है। यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी लद्दाख में चीन की विस्तारवादी नीति पर भी हमला बोला है। हाल में विदेश सेवा से अवकाश प्राप्त करने वाले वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद चीन और अमेरिका के बीच में अंतरराष्ट्रीय व्यापार युद्ध जारी रह सकता है। दोनों देशों के बीच में रिश्ते तल्ख बने रहने की उम्मीद है। सूत्र का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग में मजबूत केमिस्ट्री नहीं बन पाई है।
चीन में उम्मीद की जा रही है कि राष्ट्रपति ट्रंप चुनाव हारने वाले हैं। वहां जो बाइडन राष्ट्रपति बनेंगे। जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका से चीन के रिश्ते कुछ बेहतर होने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि जो बाइडन चीन की तरह ही भारत के साथ भी रिश्तों को गंभीरता से तरजीह देंगे।
बाइडन की नीति चीन के मामले में परिपक्व होगी, वह चीन को जगह नहीं छोड़ेंगे
रंजीत कुमार का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को दुनिया में काफी बड़ा स्पेस दिया है। चीन को ईरान तक बड़ी पहुंच अमेरिका की नीति के कारण मिली। इससे अमेरिका की लीडरशिप प्रभावित हुई है। जो बाइडन इस तरह की नीतियों पर विशेष ध्यान देंगे। इसके साथ जो बाइडन को लेकर एक आशंका भी बनी हुई है। देखना होगा कि क्या वह राष्ट्रपति ट्रंप की तरह आक्रामकता जारी रख पाते हैं या नहीं। दक्षिण चीन सागर में उनका रवैया क्या रहेगा? समझा जा रहा है कि बाइडन के जीतने पर अमेरिका, विदेश मंत्री पोम्पियो की तरह भारत में आकर चीन को आक्रामक शब्दों में आईना नहीं दिखाएगा।