पंजाब में खालिस्तान समर्थक और 'वारिस पंजाब दे' प्रमुख अमृतपाल सिंह, अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लग सका है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इस मामले में पुलिस के हाथ खाली नहीं हैं। सार्वजनिक तौर पर भले ही कोई यह कहे कि हाथ में अमृतपाल भी तो नहीं है। इतना अवश्य कहा जा सकता है कि अमृतपाल सिंह, पुलिस के बहुत करीब है। पुलिस ने उसे न्यायपालिका की मदद लेने का विकल्प सुझाया, तो वहीं अमृतपाल सिंह को लेकर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने रविवार को 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर दिया। इसमें कथित बंदी अमृतपाल सिंह को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है। अमृतपाल सिंह, जिन लोगों के इशारे पर काम कर रहा था, उन्होंने 'बर्मिंघम और ग्लासगो' में आदमी, वाहनों और भवनों को उड़ा देने वाली तकनीक, जिसे इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस 'आईईडी' कहा जाता है, का सफल प्रयोग किया था। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और पूर्व सीएम सरदार बेअंत सिंह को खत्म करने की तर्ज पर नए हमलों की प्लानिंग हो रही थी।
यह भी पढ़ें-
Amritpal Case: अमेरिका में भारतीय दूतावास पर खालिस्तान समर्थकों का हमला; ऑस्ट्रेलियाई संसद के बाहर भी जमावड़ा
किसने दिया 'खालसा' राज की स्थापना का मंत्र
इंटेलिजेंस एजेंसियों की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमृतपाल सिंह को खालिस्तान का टास्क भी पाकिस्तान से ही मिला है। यही वजह रही कि उसने वह बयान जारी करने में भी देर नहीं लगाई कि जो कोई भी नेता खालिस्तान की राह में बाधा बनेगा, उसका वही अंजाम होगा, जैसा पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और पंजाब के सीएम बेअंत सिंह का हुआ था। अमृतपाल सिंह, जो खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला 2.0 बताता है, उसने धर्म को ढाल के तौर पर इस्तेमाल करना शुरु कर दिया था। जब वह दुबई में ट्रक ड्राइवरी करता था, तो उसके लिंक पाकिस्तानी 'आईएसआई' से जुड़ गए। उसके बाद वह वैसे ही करने लगा, जैसा इशारा आईएसआई से मिलता था। आईएसआई ने अपने मंसूबे पूरे करने के लिए अमृतपाल सिंह को पंजाब में 'खालसा' राज की स्थापना का मंत्र दे डाला।
उसके बाद अमृतपाल सिंह ने वह सब करने का प्रयास किया, जैसा भिंडरांवाला करता था। उसने पंजाब के सीएम भगवंत मान के लिए साफतौर पर कह दिया कि वे रास्ते में न आएं, अन्यथा उन्हें भी बेअंत सिंह जैसा परिणाम भुगतना पड़ सकता है। सरदार बेअंत सिंह जब सीएम थे, तो उन्हें बम से उड़ा दिया गया था। दिलावर सिंह ने उनकी हत्या की थी। बतौर अमृतपाल, पंजाब में अब कई दिलावर तैयार हो गए हैं। उन्हें भी इसी तरह से मार दिया जाएगा। इतना ही नहीं, अमृतपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी चेता दिया कि वे खालिस्तान हासिल करने के हमारे प्रयास में हस्तक्षेप न करें। अन्यथा उनका भी वही हश्र होगा जो दिवंगत पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का हुआ था।
यह भी पढ़ें-
Amritpal Singh: गिरफ्तारी की तैयारी से करीबियों पर NSA तक, जानें अमृतपाल पर चौतरफा एक्शन में क्या-क्या हुआ?
अमृतपाल के सहयोगी जानते थे 'आईईडी' तैयार करना
पंजाब में खालिस्तान की स्थापना के मार्ग पर चलते हुए अमृतपाल की टीम ने अत्याधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण भी लिया था। हालांकि, अभी तक स्वचालित हथियार उसके समूह के पास पहुंचे नहीं थे। आईएसआई को ये हथियार ड्रोन के जरिए पंजाब में पहुंचाने थे। अमृतपाल ने 'खालसा वहीर' नामक अभियान चलाया। इसके जरिए लोगों को कट्टरपंथ का मार्ग बताया गया। इसके साथ ही अमृतपाल ने आनंदपुर खालसा आर्मी नामक एक नई सेना गठित कर दी। जब उसके लिंक अवतार सिंह (यूके स्थित एसएडी/एक कार्यकर्ता और खालिस्तानी आतंकवादी जगतार सिंह तारा का करीबी सहयोगी) के साथ जुड़े तो वहां से आईईडी कैसे बनाई जाती है, उसे कितने तरीके से इस्तेमाल किया जाता है, ये सब सीख लिया। रिमोट आईडी व प्रेशर आईडी तैयार करने का तरीका, अमृतपाल की टीम के हाथ लग चुका था। जगतार सिंह और बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े परमजीत सिंह 'पम्मा' की टोली ने अमृतपाल की टीम के सदस्यों को सैद्धांतिक कट्टरपंथी प्रशिक्षण कक्षाएं आयोजित करना भी सिखा दिया। उस टोली ने जब बर्मिंघम और ग्लासगो में आईईडी बनाने का लाइव प्रदर्शन किया, तो उसके कुछ ही दिन बाद पंजाब के कुछ युवाओं को वह तकनीक सिखा दी गई। यह वजह रही कि अमृतपाल ने एक झटके में मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को अंजाम भुगतने की चेतावनी दे दी। पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने ऐसे कई ड्रोन पकड़े हैं, जिनमें आईईडी बनाने का सामान पाकिस्तान से आया है।
यह भी पढ़ें-
Punjab: क्या पाकिस्तान भागने की फिराक में अमृतपाल? अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ी चौकसी, जवानों की संख्या बढ़ाई गई
क्या पुलिस जानती है कि अमृतपाल कहां है?
पंजाब पुलिस ने अमृतपाल को गिरफ्तार करने के लिए अभियान छेड़ा, तो वह मामला पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया। अगली सुनवाई मंगलवार को है। याचिकाकर्ता इमान सिंह खारा ने कोर्ट के समक्ष यह दावा किया है 'वारिस पंजाब दे' प्रमुख अमृतपाल सिंह को पुलिस ने कानून के किसी भी अधिकार के बिना अवैध और जबरन हिरासत में ले लिया है। उन्हें डर है कि कहीं पुलिस उसके साथ कुछ गलत न कर दे। सोशल मीडिया में कथित एनकाउंटर की बात भी उठी। यहां पर खास बात ये है कि अमृतपाल के सहयोगी पकड़े गए। वह गाड़ी भी बरामद कर ली गई, जिसमें अमृतपाल सवार था। अनेक समर्थकों को गिरफ्तार कर असम ले जाया गया। महितपुर से शाहकोट को जाने वाले मार्ग पर 45 गांव पुलिस छावनी बने हुए हैं।
इसके बाद पुलिस ने कहा कि अभी अमृतपाल सिंह नहीं मिला है। पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया में फर्जी खबरें फैलाने वालों को चेताया। पुलिस ने कहा, कि विभिन्न जगहों से फर्जी खबरें और नफरत भरे भाषण, फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है। कई इलाकों में 21 मार्च तक इंटरनेट पर पाबंदी बढ़ाई गई है। दूसरी ओर, पंजाब में स्थित नशा मुक्ति केंद्रों से जुड़े कुछ लोगों से भी पूछताछ हो रही है। अमृतपाल की प्लानिंग के मुताबिक, जिन लोगों के माध्यम से आईईडी का इस्तेमाल कराया जाना था, उसके लिए नशा मुक्ति केंद्रों पर मौजूद कुछ लोगों का चयन किया गया था। बहराल इस मामले में सूत्रों का कहना है कि अमृतपाल, पुलिस के घेरे से बाहर नहीं है। पंजाब पुलिस द्वारा सटीक जानकारी देने के लिए सही वक्त का इंतजार किया जा रहा है।