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पश्चिम एशिया संघर्ष: नई दिल्ली बना शांतिदूत, ब्रिक्स से इतर पेजेशकियन और यूएई के क्राउन प्रिंस ने की बैठक

Sat, 12 Sep 2026 08:54 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष नेताओं की अहम मुलाकात हुई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बातचीत की। यह बैठक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और दोनों पक्षों के बीच तनाव के बीच हुई है।
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पश्चिम एशिया संघर्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नई दिल्ली में शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच मुलाकात हुई। संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधित्व कर रहे क्राउन प्रिंस के साथ यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है।
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इस मुलाकात को नई दिल्ली की ओर से कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान पेजेशकियन ने एकतरफा और अमानवीय प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए ब्रिक्स से व्यावहारिक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को न्याय की आवाज बनना चाहिए।

ब्रिक्स बैठक में पेजेशकियन ने क्या कहा?
पेजेशकियन ने कहा, 'ब्रिक्स के सदस्य देशों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिक ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को सामान्य बनाए जाने का विरोध करें, क्योंकि इन स्थलों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। फलस्तीन का मुद्दा और फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को बनाए रखना वैश्विक शासन की विश्वसनीयता और वैधता की गंभीर परीक्षा है और इसके लिए ब्रिक्स को सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।'
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इससे पहले ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को अपनाया। इसमें पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने के साथ ऐसे कदमों से बचने का आह्वान किया गया, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं।

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में क्या-क्या शामिल?
घोषणा-पत्र में कहा गया, 'हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पूर्ण और परस्पर जुड़े स्वरूप के अनुसार नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं। इसमें देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी शामिल है। हम संवाद और कूटनीति के माध्यम से ऐसे दीर्घकालिक समझौते की दिशा में प्रयास बढ़ाने को प्रोत्साहित करते हैं, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान दे। हम वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा के सुचारु प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर देते हैं, जो लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप हो।'

गाजा में युद्धविराम बनाए रखने की अपील
घोषणा में आगे कहा गया, 'हम अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रासंगिक प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए पूर्ण सुरक्षा उपायों के तहत आने वाले नागरिक बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा उपायों, सुरक्षा और संरक्षा को हमेशा बनाए रखा जाना चाहिए।'

ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों को लागू करने का भी आह्वान किया। साथ ही सभी पक्षों से गाजा पट्टी में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की पूर्ण तथा बिना किसी बाधा के पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की।
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