पश्चिम एशिया में जारी भीषण टकराव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को संकट में डाल दिया है। ईरान की ओर से क्षेत्र के तेल-गैस ढांचे को आग लगाने की धमकी के बाद हालात और विस्फोटक हो गए हैं। इसी बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए रास्ते में मौजूद रूसी तेल की खरीद पर सभी देशों को अस्थायी छूट देने का फैसला किया है।
पश्चिम एशिया इन दिनों बारूद के ढेर पर खड़ा है। पिछले दो हफ्तों से जारी भीषण सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को हिला कर रख दिया है। हालात तब और भड़क उठे जब ईरान ने खुलेआम चेतावनी दे डाली कि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को आग के हवाले कर देगा। इस धमकी ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है और सप्लाई ठप पड़ने का डर और गहरा गया। इसी बढ़ते संकट के बीच अब अमेरिका ने अचानक रुख बदलते हुए दूसरे देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी मंजूरी देने का फैसला किया है।
भारत को पहले ही मिल चुकी है रियायत
बता दें कि इससे पहले अमेरिका भारत को भी इसी तरह की छूट दे चुका है। 5 मार्च को अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष अनुमति दी थी, जिसके तहत भारत रूस से तेल खरीद सकता है। ट्रंप प्रशासन ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया था ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे और कीमतों पर दबाव कम हो।
ईरान के खतरे से निपटने की कोशिश में अमेरिका- बेसेंट
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए तेजी से फैसले ले रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान से पैदा हो रहे खतरे और अस्थिरता से भी निपटने की कोशिश कर रहा है। बेसेंट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुमति सिर्फ उस रूसी तेल पर लागू होगी जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में जा रहा है।
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