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UNHRC में ईरान मुद्दा: भारत के रुख की सराहना कर तेहरान ने कहा- यह न्याय और संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता

Sat, 24 Jan 2026 09:43 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यूएनएचआरसी में ईरान के खिलाफ लाए गए मानवाधिकार प्रस्ताव का भारत ने विरोध किया, जिस पर तेहरान ने सराहना जताई। ईरान ने कहा कि भारत का रुख न्याय, बहुपक्षवाद और संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप है। भारत उन चुनिंदा देशों में रहा, जिन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। इससे भारत-ईरान रिश्तों की गहराई फिर सामने आई।
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मोहम्मद फतहली - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ईरान से जुड़े मानवाधिकार प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत के रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। भारत द्वारा प्रस्ताव का विरोध किए जाने पर ईरान ने खुलकर सराहना की है। तेहरान ने कहा है कि भारत का यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान में मानवाधिकार स्थिति को लेकर वैश्विक दबाव बढ़ा हुआ है।

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भारत ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 39वें विशेष सत्र में ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें वहां मानवाधिकार स्थिति पर निगरानी बढ़ाने की मांग की गई थी। भारत ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और इसे चुनिंदा तथा राजनीतिक रूप से प्रेरित पहल बताया। मतदान में 25 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में, सात देशों ने विरोध में वोट दिया, जबकि 14 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव पारित हो गया, लेकिन भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल रहा, जिन्होंने खुलकर इसका विरोध किया।

ईरान ने भारत के रुख को कैसे देखा?
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भारत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि यूएनएचआरसी में भारत का रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति उसकी सैद्धांतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला भारत-ईरान संबंधों की गहराई और आपसी भरोसे को मजबूत करता है।
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भारत-ईरान रिश्तों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भी भारत-ईरान संबंधों की ऐतिहासिक जड़ों को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के संबंध इस्लाम के उदय से भी पहले के हैं। ईरान में लंबे समय तक भारतीय दर्शन, गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र का अध्ययन होता रहा है। उन्होंने चाबहार परियोजना में भारत के साथ सहयोग की उम्मीद भी जताई, जिसे दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों के लिए अहम माना जाता है।

ईरान में हालात और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान में हालिया सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार कार्रवाई में 3,117 लोगों की मौत हुई है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने इससे अधिक संख्या होने का दावा किया है। इन घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई है और अमेरिका ने भी ईरान सरकार की निंदा की है। ऐसे माहौल में भारत का संतुलित और स्वतंत्र रुख वैश्विक कूटनीति में खास माना जा रहा है।
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भारत की कूटनीतिक लाइन क्या कहती है?
भारत का कहना है कि मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाया जाना चाहिए, न कि दबाव और चुनिंदा प्रस्तावों का। भारत का यह रुख उसकी पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जिसमें संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और बहुपक्षवाद को प्राथमिकता दी जाती है। ईरान ने भी इसी सोच के लिए भारत की प्रशंसा की है।

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