गृह मंत्री शाह ने गांधीनगर में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) के नवनिर्मित परिसर के उद्घाटन के बाद कहा, केंद्र सरकार ने एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है और 16 एपीआई (सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक) और दो केएसएम (प्रमुख प्रारंभिक सामग्री) के लिए किफायती, टिकाऊ और लागत प्रभावी प्रक्रिया विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने कहा कि अगले एक दशक में भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि उन्हें (एपीआई और केएसएम) निर्यात करने की स्थिति में भी होगा।
उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी सरकार ने पीएलआई योजना के तहत फार्मास्युटिकल विनिर्माण क्षेत्र में करीब 48 छोटे-बड़े उद्योगों को 4,000 करोड़ रुपये के निवेश की इजाजत दे दी है। शाह ने कहा, चिकित्सकीय उपकरण विनिर्माण के लिए भी पीएलआई योजना शुरू की गई, जिसके तहत केंद्र ने 26 निवेशकों को 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की अनुमति दी है।
तीन हजार करोड़ की लागत से तीन थोक दवा पार्क बनाए
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की कुल लागत से तीन थोक दवा पार्क बनाए हैं। भारत को चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 लेकर आई है और अब इसके निर्यात के लिए भी एक अलग नीति बनाई जा रही है। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया भी मौजूद रहे।