अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भारतीय रिजर्व बैंक के एक लेख में यह संभावना जताई गई है। हालांकि आरबीआई ने साफ किया है कि लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
केंद्रीय बजट में पूंजी खर्च पर जोर से निजी निवेश में तेजी की उम्मीद है। इससे रोजगार उत्पन्न होने तथा मांग और भारत की वृद्धि संभावना बढ़ी है। इस आधार पर अगले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर सात प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है।
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अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक लेख में यह संभावना जताई गई है। हालांकि आरबीआई ने साफ किया है कि लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
आरबीआई के लेख में शुक्रवार को कहा गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में पूंजीगत खर्च 10 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा गया है जो जीडीपी का 3.3 फीसदी है। अर्थव्यवस्था की स्थिति पर प्रकाशित लेख में कहा गया है, हमारा मानना है कि भारत की स्थिति व्यापाक आर्थिक अनुमान से अलग होगी और दुनिया के अन्य भागों से भी यह हटकर होगी। हमारे विचार से इसे अलग करने वाली चीज केंद्रीय बजट है। इससे 2023-27 के दौरान भारत की वृद्धि संभावना बढ़ी है।
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आपूर्ति-लागत के मोर्चे पर होगा सुधार
लेख के अनुसार हालांकि जनवरी में महंगाई बढ़ी है, आपूर्ति और लागत के मोर्चे पर स्थिति सुधरने की उम्मीद है। सभी सभ्यताओं की पौराणिक कथाओं को याद करते हुए, लेखकों ने कहा कि सूर्य को आमतौर पर चार घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ की सवारी के रूप में दर्शाया गया है। हमारे विचार में केंद्रीय बजट 2023-24 सूरज का सातवां घोड़ा है।