सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के खिलाफ दिल्ली और नोएडा पुलिस के पास लंबित सभी खरीदारों की शिकायतों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपने का निर्देश दिया है। दरअसल, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कोर्ट से यह साफ करने का आग्रह किया कि कुछ मामले दिल्ली और कुछ यूपी के थानों में दर्ज हैं। तो इनकी एक साथ जांच की जाए या अलग-अलग। इस पर जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि सभी मामलों की जांच ईडी को करने दीजिए।
एसबीआई कैप ने कहा, वह आम्रपाली के आठ प्रोजेक्ट के लिए 1,000 करोड़ देने को तैयार है। इसकी रूपरेखा तैयार करने में तीन-चार हफ्ते लगेंगे। इस पर अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में एसबीआई कैप की ओर से बताया गया कि आम्रपाली के आठ प्रोजेक्ट के लिए फंड देने का निर्णय लगभग हो गया है। एसबीआई कैप की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि कंपनी 12 फीसदी ब्याज लेगी। फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश वकील एमएल लाहौटी ने 12 फीसदी ब्याज दर पर आपत्ति जताई और कहा कि यह बहुत ज्यादा है। साल्वे ने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने लीज रकम के ब्याज का मुद्दा उठाया और कहा कि करार में जो रकम लिखी गई है, उसका भुगतान किया जाना चाहिए। अथॉरिटी का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने रखा। इस दौरान यह मसला भी उठा कि कुछ खरीदारों की एसोसिएशन एनबीसीसी से सीधा संपर्क कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा कि खरीदार एनबीसीसी से सीधा संपर्क नहीं करेंगे।