क्या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिकारी तंजील अहमद की सनसनीखेज हत्या के तार आतंकवाद से जुड़े हैं। जांच में जुटी चार जांच एजेंसियां, एनआईए, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, यूपी एसटीएफ और एटीएस इसी सवाल का जवाब ढूंढने में लगी हैं।
दरअसल एनआईए में प्रतिनियुक्ति से आए बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट तंजील की हत्या को जिस सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, उससे जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। एनआईए अधिकारी की हत्या के लिए बनाई गई मजबूत योजना, पेशेवर शूटरों और ऑटोमैटिक हथियारों का इस्तेमाल तथा ताबड़तोड़ चलाई गईं 24 गोलियां वारदात के तार आतंकवाद से जुड़े होने का इशारा कर रही हैं। तंजील वर्तमान में बिजनौर में हुए बम धमाके के अलावा कई अन्य संवेदनशील मामलों की जांच से जुड़े थे। एनआईए ने भी आधिकारिक तौर पर इसे सुनियोजित हमला करार दिया है।
एनआईए सूत्रों के मुताबिक हमलावरों को तंजील के अपनी भांजी की शादी में आने की पुख्ता जानकारी थी। हमलावरों ने इसी के आधार पर उन्हें मारने की योजना तैयार की। तंजील की समारोह स्थल से अपनी वैगन आर कार से वापसी के दौरान हमलावरों ने बाइक से उनका करीब आधे घंटे तक पीछा किया।
फिर कार को ओवरटेक करने के बाद ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। इस दौरान तंजील की जीवित बचने की सारी संभावनाएं खत्म करने के लिए बेहद नजदीक से गोलियां बरसाई गईं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चलाई गईं 24 गोलियों में से 9 गोलियां शरीर के आर पार हो गईं।
सूत्रों के मुताबिक हमले में ऑटोमैटिक हथियार और 9 एमएम के बोर का इस्तेमाल किया गया है। साधारण अपराधी 9 एमएम की बोर का इस्तेमाल नहीं करते। इसके अलावा अगर यह पारिवारिक या अन्य तरह की रंजिश का मामला होता तो हमलावर परिवार के अन्य सदस्यों को भी निशाना बनाने से नहीं चूकते।
इस मामले में साफ तौर पर प्रतीत होता है कि हमलावर सिर्फ तंजील की हत्या करने के लिए आए थे क्योंकि उन्होंने उसी कार में बैठे उनके दोनों बच्चों को निशाना नहीं बनाया। चूंकि तंजील की पत्नी उनके बगल में बैठी थीं, इसलिए उन्हें तंजील को निशाने पर लेकर चलाई गई गोलियां लगीं।
जांच में जुटीं 6 टीमें
मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए चार जांच एजेंसियों की 6 टीमें बनाई गई हैं। इनमें एनआईए और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक-एक, यूपीए एसटीएफ और एटीएस की दो-दो टीमें शामिल हैं। तंजील आतंकवाद से संबंधित किन-किन मामलों की जांच से जुड़े थे, इसका खुलासा नहीं हो पाया है। कहा जा रहा है कि वह फिलहाल बिजनौर धमाके की जांच से जुड़े थे। अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक तंजील पठानकोट हमला मामले की जांच से भी जुड़े थे। जांच के लिए जब पाकिस्तान का संयुक्त जांच दल यहां आया तो तंजील ने संपर्क अधिकारी की भूमिका निभाई थी।
राजनाथ की यूपी सरकार को नसीहत
एनआईए अधिकारी की सनसनीखेज हत्या मामले में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गहरी नाराजगी जताई है। सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार लाने की नसीहत दी है।
पांच साल से जुड़े थे एनआईए से, उर्दू के थे माहिर
नई दिल्ली/बिजनौर। तंजील बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट थे। पांच वर्ष पूर्व उन्हें एनआईए में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। उर्दू के अच्छे जानकार होने के कारण वह टीम के बहुत मददगार थे। टीम में शामिल अफसर व कर्मचारी उर्दू नहीं जानते थे, जबकि तंजील की इस भाषा पर अच्छी पकड़ थी।
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान व भारत से आतंकियों के उर्दू में आने वाले दस्तावेज और कोड के शब्दों को तंजील ही पढ़कर सुनाते थे। उर्दू में जो भी काम टीम के सामने आता, उसे तंजील ही अंजाम देते। उनके रहने से टीम को उर्दू के मामलों में कोई परेशानी नहीं होती थी।
उर्दू की गहरी समझ के कारण ही पठानकोट हमला मामले की जांच में भी उनकी सेवा ली गई थी। सूत्रों के अनुसार कहीं मुस्लिम आबादी में भेजने पर भी टीम तंजील अहमद की मदद लेती थी। वह मुस्लिमों में घुल मिलकर टीम की सहायता करते थे।
एसटीएफ, एटीएस समेत कई एजेंसियों का डेरा
एनआईए अफसर के हत्यारों को ढूंढने के लिए एसटीएफ-एटीएस समेत कई एजेंसियों ने डेरा डाल दिया है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद कई लोगों से पूछताछ की गई है। इस क्षेत्र के टॉवर से जुड़े कुछ नंबरों को सर्विलांस पर भी लगाया गया है।
रविवार सुबह ही एसटीएफ और एटीएस की टीम बिजनौर पहुंच गई। स्पेशल टीम के कुछ अफसर मुरादाबाद भी पहुंचे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में जानकारी ली। तंजीन की कार का भी फोरेंसिक टीम ने मुआयना किया। सूत्रों का कहना है कि कुछ मोबाइल नंबरों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। इन नंबरों पर आने और इनसे किए जाने वाले फोन नंबरों की काल डिटेल निकाली जा रही है।