भारत में अंतरराज्यीय प्रवास में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। 1991-2001 की तुलना में 2001-11 के बीच भारत में अंतरराज्यीय प्रवास में दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं एशियाई क्षेत्र में पुणे और सुरत इससे सबसे अधिक प्रभावित राज्य के रूप में सामने आए हैं।
‘प्रवास और शहर’ पर विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे तेज शहरों में से एक चौथाई भारत में हैं। वहीं मुंबई, दिल्ली और कोलकाता दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाली शहरों में से हैं।
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एशियाई क्षेत्र में ग्वांगझोउ और दवाओ शहर के अलावा पुणे और सुरत सबसे अधिक प्रभावित शहरों में से हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यहां पर दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की तुलना में तीन गुना अधिक आंतरिक प्रवासी हैं।
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि भारत में पिछले दशक की तुलना में 2001-11 के बीच प्रवासियों की संख्या दोगुनी हो गई। यहां पर प्रवासियों की संख्या 4.5 फीसदी की दर से सालाना बढ़ी है। इसमें आगे कहा गया कि देश में सालाना अंतरराज्यीय प्रवासियों की संख्या औसतन सालाना लगभग 50-60 लाख है।
डब्ल्यूईएफ के प्रमुख एलिस चार्ल्स ने कहा कि प्रवासी आर्थिक, सामाजिक और रचनात्मक अवसरों के लिए शहरों की तरफ आते हैं। रिपोर्ट में उन्होंने बिहार का उदाहरण भी दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार से सबसे अधिक लोग प्रवास करते हैं जिसकी प्रति व्यक्ति आय सोमालिया के बराबर है और जन्मदर प्रति महिला पर 3.4 बच्चों का है।
दूसरी तरफ प्रवासियों के गंतव्य केरल की प्रति व्यक्ति आय बिहार का चार गुना है जो कि डेनमार्क के बराबर है और जन्मदर प्रति महिला 1.6 है। वहीं फरीदाबाद, लुधियाना और सुरत में लगभग 55 फीसदी प्रवासी आते हैं जबकि आगरा और इलाहाबाद में यह दर 15 फीसदी से कम है।