मूक-बाधिर लोगों को समझाता था प्रधानमंत्री का भाषण
इरफान ख्वाजा ने पहली बार राजकोट में प्रधानमंत्री के साथ 29 जून 2017 को मंच साझा किया था। वहीं दूसरी बार 29 फरवरी 2020 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए कार्यक्रम में भी वह प्रधानमंत्री के साथ मंच पर था। ये दोनों ही मौके ऐसे थे जब इरफान ने प्रधानमंत्री के भाषण का मूक-बाधिर लोगों के लिए अनुवाद किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इरफान से हाथ भी मिलाया था और पीठ थपथपा कर उसके काम की प्रशंसा भी की थी।
लेकिन, एक ऐसा शख्स पीएम के इतने करीब तक कैसे पंहुचा, इसको लेकर राजनीतिक गर्माहट भी तेज हो गई है। एटीएस आईजी जीके गोस्वामी का कहना है कि इरफान बाल कल्याण मंत्रालय में में जिम्मेदार पद पर नियुक्त था। हो सकता है वह किसी कार्यक्रम में पीएम के साथ शामिल हुआ हो। हमारी जांच में यह सामने आया है कि वह धर्मांतरण के मामले में शामिल था। उसकी भूमिका अहम है। इस मामले में अभी और भी जांच चल रही है।
एटीएस का दावा है कि इरफान धर्मांतण के लिए मूक-बधिर बच्चों को ही टारगेट करता था। इसके लिए वह हिंदू और दूसरे धर्म के बच्चों की रेकी करता था। इसके साथ ही वह बच्चों को दूसरे धर्म की बुराइयां बताकर उन्हें धर्मांतरण के लिए तैयार करता था। एटीएस के अनुसार इरफान शेख बच्चों की सूची धर्मांतरण कराने वाले मौलाना उमर गौतम और जहांगीर आलम को उपलब्ध कराता था।