बांधवगढ़, बांदीपुर, नागरहोल, मुदुमलाई और काजीरंगा में 100 से ज्यादा बाघ हैं। इसके अलावा दुधवा, कान्हा, तडोबा, सत्यमंगलम और सुंदरबन में 80 से ज्यादा बाघ मिले हैं। मिजोरम के डंपा और पश्चिम बंगाल के बुक्सा रिजर्व में बाघ नहीं बचे हैं। वहीं, पलामू टाइगर रिजर्व में एक भी बाघ की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई है।
करीब 25% बढ़े संरक्षित क्षेत्र
2014 में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 692 थी, जो 2019 में बढ़कर 860 से ज्यादा हो गई। साथ ही कम्यूनिटी रिजर्व भी 2014 में 43 थे, जो पिछले साल बढ़कर सौ के पार पहुंच गए।
टाइगर रिजर्व 9 से बढ़कर हुए 50
1970 के दशक में भारत में 2,000 से भी कम बाघ बचे थे। सरकार ने 1973 में बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया और प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघ संरक्षण की मुहिम शुरू हुई। 1973 में सिर्फ नौ टाइगर रिजर्व थे, जो सिर्फ 18,278 वर्ग किमी में फैले थे। लेकिन अब इनकी तादाद बढ़कर 50 हो गई है, जिनका क्षेत्रफल 72,749 वर्ग किमी है। हालांकि यह अभी भारत के भौगोलिक क्षेत्र का सिर्फ 2.2 फीसदी ही है।