वर्ष 2014 में जब आखिरी बार बाघों की गणना हुई तब यह संख्या बढ़कर 2,226 पहुंच गई। रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर भारत इस बात से खुद को दिलासा दे सकता है कि वह अब भी सबसे अधिक बाघों की आबादी वाला देश बना हुआ है। यह संख्या जहां देश के लिए गौरव की बात है।
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध शिकार, घटते वन क्षेत्र और विकास परियोजनाओं से बाघों के प्राकृतिक वास स्थान का अतिक्रमण हो रहा है। इससे निपटने की आवश्यकता है। अगर उनसे निपटा नहीं गया तो भारत के इस राष्ट्रीय पशु का भविष्य संकट में होगा।