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अमेरिका, यूरोप में बढ़ेंगी ब्याज दरें, महंगाई गिरने से भारत को सहारा

Wed, 16 Jan 2019 05:10 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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वैश्विक अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार, व्यापार युद्घ का बढ़ता दायरा और अस्थिर वित्तीय बाजार के कारण वर्ष 2019 के अंत तक दुनिया के अधिकतर केंद्रीय बैंक अपने रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकते हैं। ब्लूमबर्ग के वैश्विक सर्वे में अमेरिका, यूरोप, जापान, इंग्लैंड सहित कई बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों ने ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। हालांकि, भारतीय केंद्रीय बैंक को आर्थिक विकास की बेहतर रफ्तार का साथ मिलेगा और यहां 2019 के आखिर तक ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद है। चीन के आर्थिक विकास को बड़ा झटका लगने के बावजूद पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने अपने रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं करने के संकेत दिए हैं। 
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जी-7 देश बढ़ाएंगे ब्याज

दुनिया के सबसे धनी देशों के समूह जी-7 ने भी वर्ष 2019 में अपने रेपो रेट में बढ़ोतरी की बात कही है। आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा अमेरिका 0.5 फीसदी तो महंगाई से त्रस्त यूरोप 0.10 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसी तरह ब्रेग्जिट प्रक्रिया से हिला इंग्लैंड 0.25 फीसदी, तेल उत्पादन की मार झेल रहा कनाडा 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी साल के आखिर कर करेंगे। इस समूह में शामिल एकमात्र एशियाई देश जापान ने ब्याज दरें स्थिर रखने के संकेत दिए हैं।

ब्रिक्स देशों में ज्यादा स्थिरता

सर्वे में शामिल ब्रिक्स समूह में सिर्फ दो देशों ने ही ब्याज दरें बढ़ाने की बात कही है। अमेरिका के साथ व्यापार युद्घ की मार झेल रहा चीन मुश्किलों के बावजूद अपनी ब्याज दरें स्थिर रख सकता है। भारत ने भी इस साल रेपो रेट में इजाफा नहीं करने का संकेत दिया है जबकि तीन बार से ब्याज दर बढ़ा रहे रूस में इस बार राहत मिल सकती है। रूस ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती की बात कही है। हालांकि, बदलाव के दौर से गुजर रहा ब्राजील 0.75 फीसदी और महंगाई की मार झेल रहा दक्षिण अफ्रीका 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकते हैं।                  
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जी-20 देशों पर भी मार

जी-20 समूह के अधिकतर देश के केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों में इस साल बढ़ोतरी करेंगे। समूह के प्रमुख देश दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया ब्याज दरें स्थिर रख सकते हैं जबकि सऊदी अरब ने 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। 

महंगाई गिरने से भारत को सहारा

भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त की शुरुआती दो बैठकों में लगातार रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। हालांकि, थोक और खुदरा महंगाई के दिसंबर के आंकड़ों ने उसे बड़ा सहारा दिया और उम्मीद की जा रही है कि आने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट कम होगा। दूसरी ओर, केंद्रीय बैंक ने सर्वे में संकेत दिया है कि क्रूड ऑयल में नरमी और रुपये में मजबूती रही तो वह इस साल ब्याज दरें स्थिर रख सकता है।

बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों का अनुमान
 
देश   मौजूदा ब्याज दर अनुमानित दर 
अमेरिका 2.5 फीसदी  3 फीसदी
यूरोप  -0.4 फीसदी -0.25 फीसदी
जापान  -0.1 फीसदी -0.1 फीसदी
इंग्लैंड    0.75  फीसदी 1 फीसदी
चीन 4.35  फीसदी 4.35 फीसदी
भारत 6.5 फीसदी 6.5 फीसदी
स्विस बैंक  -0.75 फीसदी -0.50 फीसदी
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