हवाला रैकेट मामले में गिरफ्तार किए गए चीनी नागरिक लुओ सांग उर्फ चार्ली पेंग के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। उससे पूछताछ में जांच एजेंसियों को पता चला है कि पेंग दिल्ली में कुछ लामाओं के संपर्क में था। एजेंसियों को शक है कि पेंग बौद्ध धर्म के सर्वोच्च गुरु दलाई लामा और उनके सहयोगियों की जानकारी एकत्र कर रहा था।
जांच में पता चला है कि पेंग ने दिल्ली में मजनू का टीला में कुछ लामाओं और अन्य व्यक्तियों को रुपये दिए थे। जांच एजेंसियों का शक इसलिए गहरा रहा है क्योंकि मजनू का टीला इलाके में बौद्धों की अच्छी खासी आबादी निवास करती है। ऐसे में एजेंसियों को लग रहा है कि पेंग ने दलाई लामा की जानकारी पाने के लिए लोगों से संपर्क किया था।
पूछताछ में पता चला है कि चार्ली पेंग साल 2006 में छह तिब्बतियों के साथ पैदल नेपाल गया था। यहां साल 2009 से 2014 तक वह काठमांडू के पास एक मठ में रहा, जहां उसने औषधियों और जड़ी-बूटियों का काम शुरू किया था। मठ में रहने के दौरान ही कुछ लोगों ने उसे सुझाव दिया था कि वह भारत जाए क्योंकि वहां वह अच्छी राशि कमा सकता था।
इसके बाद वह 2014 में वह काठमांडू से भारत आया। यहां राजधानी दिल्ली के मजनू का टीला इलाके को उसने अपना ठिकाना बनाया। यहां वह पंजाबी बस्ती इलाके में रहता था। पूछताछ में पता चला है कि नेपाली मठ के दस्तावेजों के आधार पर उसने तिब्बती पहचान पत्र भी हासिल कर लिया था, जिससे लामाओं के बीच वह पकड़ बना पाया।
उसने यहां दिल्ली में नूडल्स का काम शुरू किया था और बाद में बढ़ते-बढ़ते हवाला रैकेट तक जा पहुंचा। पेंग ने हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में स्थित दलाई लामा की टीम में घुसपैठ करने के कई प्रयास किए थे। धीरे-धीरे उसका कारोबार बढ़ा और उसने द्वारका में एक फ्लैट ले लिया। बाद में दलाल के जरिए उसने भारतीय आधार और पैन कार्ड भी बनवा लिया था।