अंतरराष्ट्रीय पुलिस (इंटरपोल) के महासचिव जे. रगेन स्टॉक ने शुक्रवार को कहा कि इंटरपोल नोटिसों की अखंडता की रक्षा समर्पित वकीलों, विशेषज्ञों और एक स्वतंत्र आयोग द्वारा की जाती है। स्टॉक यहां सीबीआई की ओर से आयोजित तीसरे 'इंटरपोल यंग ग्लोबल पुलिस लीडर्स' कार्यक्रम को वर्चुअल तरीके से संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में 44 देशों के युवा अधिकारी भाग ले रहे हैं।
इंटरपोल के पास कई रंगीन नोटिस हैं जिनके माध्यम से सदस्य देशों को भगोड़ों, लापता व्यक्तियों, काम करने के तरीके, अज्ञात शवों, खुफिया जानकारी के बारे में सतर्क किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने की प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया था, जो किसी देश के भगोड़े का पता लगाने के लिए प्रकाशित किया जाता है।
स्टॉक ने कहा, आपराधिक गतिविधियों के वैश्वीकरण से निपटने के लिए सही तकनीकी सुरक्षा होनी चाहिए,आर्टिफिशिलय इंटेलीजेंस और बड़े डेटा के आने के साथ नई चुनौतियां उभर रही हैं। उन्होंने कहा, आपराधिक गतिविधि के वैश्वीकरण से प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण की मौलिक आवश्यकता है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल, विशेष निदेशक प्रवीण कुमार सिन्हा, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह और गृह मंत्रालय में विशेष सचिव एस सुंदरी नंदा सहित शीर्ष अधिकारियों ने प्रतिभागियों के साथ बातचीत की।
सीबीआई निदेशक जायसवाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, यह कार्यक्रम भारत में पुलिस प्रणाली के पैमाने और दायरे और अपनाए जा रहे विभिन्न नवाचारों (इनोवेशन) और सर्वोत्तम प्रथाओं का अवलोकन करेगा और भविष्य के पुलिस नेतृत्व के क्षमता निर्माण में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत में पुलिस द्वारा विकसित समृद्ध पेशेवर क्षमताएं, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाएं अन्य देशों के अनुकरण के लिए एक टेम्पलेट हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल 'विश्वगुरु भारत' की भावना के अनुरूप पुलिसिंग क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण की दिशा में योगदान देने का भी प्रयास करती है।