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Accident Case: इंश्योरेंस कंपनी ने ट्रिब्यूनल के फैसले को दी चुनौती, हाई कोर्ट ने चार गुना मुआवजा देने को कहा

Mon, 14 Nov 2022 06:02 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू

सार

कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना में केवल दोपहिया वाहन शामिल था, न कि ऑटो-रिक्शा। ऑटो-रिक्शा का बीमाकर्ता होने के कारण कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सड़क दुर्घटना मामले में मुआवजा दिए जाने के आदेश को चुनौती देना एक बीमा कंपनी को खासा महंगा पड़ा। इस कंपनी ने मोटर वाहन दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए 11.39 लाख रुपये के मुआवजे को चुनौती दी थी, लेकिन उसे कर्नाटक हाई कोर्ट ने पीड़ित को लगभग 45 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने मोटर वाहन न्यायाधिकरण के 2015 के फैसले के खिलाफ अपील के साथ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने उसे एक इंजीनियरिंग छात्र एल्विन लोबो को 11,39,340 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

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ऑटोरिक्शा से टक्कर में आई थी गंभीर चोट 
लोबो अपने भाई के साथ एक मोटरबाइक पर यात्रा कर रहे थे जो एक ऑटो-रिक्शा से टकरा गया। उन्हें गंभीर चोटें आईं और कई महीने अस्पताल में रहे। उनके सिर पर भी स्थायी चोट आई थी। इस मामले में दिए गए मुआवजे को कंपनी ने चुनौती दी थी, जिसमें दावा किया गया था कि ड्राइवर लोकेश गौड़ा लोबो का पड़ोसी था और उन्हें मुआवजा दिलाने में मदद करने के लिए दुर्घटना को अंजाम दिया गया था। कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना में केवल दोपहिया वाहन शामिल था, न कि ऑटो-रिक्शा। ऑटो-रिक्शा का बीमाकर्ता होने के कारण कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।

याचिका पर सुनवाई करने वाले न्यायमूर्ति एचपी संदेश ने अपने हालिया फैसले में कहा, यह धोखाधड़ी और वाहन को फंसाने का मामला था, अदालत के समक्ष कोई पर्याप्त सामग्री नहीं रखी गई। हाईकोर्ट ने मुआवजे को पीड़ित के सिर की चोट को देखते हुए बढ़ाया। दावेदार को कई चोटें लगी थीं और ट्रिब्यूनल के समक्ष डॉक्टर की भी गवाही हुई। दुर्घटना से याचिकाकर्ता को 65 प्रतिशत स्थायी शारीरिक अक्षमता हो गई। लेकिन बिना कोई कारण बताए ट्रिब्यूनल ने विकलांगता को 25 प्रतिशत तक कम कर दिया।  
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विभिन्न मदों में मुआवजे को बढ़ाते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि दावेदार ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए 11,39,340 रुपये के मुकाबले 44,92,140 रुपये के मुआवजे का हकदार है। हालांकि, 2009 से राशि के लिए देय ब्याज को राष्ट्रीयकृत बैंकों में जारी ब्याज दर को ध्यान में रखते हुए आठ प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत कर दिया गया।
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