ताजमहल की संगमरमरी दीवारें हरे रंग की करने वाले कीड़ों की जांच के लिए एएसआई की कई टीमें ब्योरा जुटा रही हैं। सोमवार को एएसआई केमिकल ब्रांच की टीमों ने ताजमहल के पास कीड़ों के आने-जाने की दिशा और उनके स्राव का फिर से सैंपल जुटाया। आईआईटी कानपुर को सैंपल भेजने से पहले ताजमहल के आसपास के पर्यावरण का पूरा ब्योरा भेजा जाएगा।
वहीं, एएसआई एक्सपर्ट के मुताबिक गंदगी से आ रहे कीड़े और सूखी यमुना से उड़ रही रेत ताजमहल को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। ताजमहल पर इन दिनों आए कीड़ों ने एएसआई के साथ कीट विज्ञानियों को भी चौंका दिया है। बारिश के बाद अक्तूबर में तो कीड़े हर साल आते रहे हैं, लेकिन यह पहला मौका है, जब सामान्य से 5 से 7 डिग्री ऊपर तापमान और शुष्क मौसम में ताज पर कीड़ों का हमला हुआ हो। इसके लिए ताजमहल के पीछे गंदे नाले के रूप में बह रही यमुना नदी को जिम्मेदार माना जा रहा है।
एएसआई विशेषज्ञों के मुताबिक इन दिनों भीषण गर्मी के कारण यमुना में पानी नहीं है। गंदे नाले के साथ सिल्ट जमा है, जिस पर घातक कीड़े आ रहे हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाले हानिकारक रसायन कीड़ों के साथ ताजमहल तक पहुंचते हैं। इस तरह कीड़ों के पैरों के साथ इनका स्राव ताज को दोहरा नुकसान पहुंचा रहा है। ताज पर कीड़ों के हमले की एक प्रमुख वजह ये भी हो सकती है। हालांकि एएसआई केमिकल ब्रांच ने सोमवार को टीमों को जरिए कीड़ों के आने-जाने की दिशा, पर्यावरण का ब्योरा तैयार किया।
ताजमहल पर 30 साल तक रिसर्च और संरक्षण का हिस्सा रहे रिटायर्ड अधिकारी डा. आरके दीक्षित के मुताबिक ताजमहल के संगमरमर से रेत जब टकराती है तो मार्बल के क्षरण के साथ इसकी चमक भी खत्म हो रही है। यमुना की गंदगी के चलते कीड़े ताज पर बैठते हैं तो उनके जरिए कई केमिकल ताज पर पहुंच रहे हैं। इसका एक मात्र उपाय ये है कि ताज के पीछे पर्याप्त स्वच्छ पानी हो और यह हमेशा बहता रहे।