इस संबंध में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के उम्मीदवारों को 5 साल की छूट मिली है, जिसका मतलब है कि वे अधिकतम 30 वर्ष के हो सकते हैं। यदि कोई छात्र आयु सीमा मानदंडों और अन्य शर्तों जैसे प्रयासों और शैक्षिक योग्यता मानदंडों को संतुष्ट करता है, तो वे एनईईटी परीक्षा में प्रदर्शित हो सकते हैं।
इस विषय पर विवादों की लंबी है फेहरिस्त
नीट परीक्षा की आयु सीमा को लेकर पिछले साल बदलाव भी हुए, नीट 2018 की आयु सीमा हटाई गई और फिर दोबारा शुरू की गई। लेकिन इससे आयु सीमा का विरोध करने वाला छात्रों का एक हिस्सा उग्र हो गया। बता दें कि सीबीएसई ने अभी तक इस पर अंतिम निर्णय को सूचित नहीं किया है, लेकिन 23 जनवरी 2018 के एमसीआई के राजपत्र को अंतिम निर्णय के रूप में लिया जा सकता है।
25 साल की आयु सीमा (ऊपरी आयु सीमा) पिछले वर्ष शुरू की गई थी। परीक्षा के वर्ष के लिए नीट की जानकारी ब्रोशर ने कहा, ''ओबीसी / एससी / एसटी श्रेणी से संबंधित उम्मीदवारों के लिए 5 वर्ष की छूट के साथ परीक्षा की तारीख के अनुसार एनईईटी की ऊपरी आयु सीमा है। (पत्र सं। U.12023 / 16/2010-ME-II के अनुसार दिनांक 17.01.2017 को एमओएच और एफडब्ल्यू से प्राप्त)।''
सुप्रीम कोर्ट ने एमसीआई को इस पर गौर करने के लिए कहा, जिस पर एमसीआई ने कहा था कि युवाओं को ज्ञान समझने की बेहतर क्षमता है और 25 वर्ष से कम उम्र के लोग दवाओं का अध्ययन करने में अधिक सक्षम हैं।
ऊपरी आयु सीमा होने के समर्थन में एक और तर्क यह है कि जिस छात्र ने अभी तक 12 कक्षा पास की है, वह कई पुराने छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं जो कई वर्षों तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। यह युवा छात्रों के लिए अन्यायपूर्ण है और इसलिए अधिकतम आयु सीमा होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमरेंद्र शरण ने पीठ के समक्ष कहा था कि ऊपरी आयु सीमा निर्धारित करना विशेषज्ञ समिति की पूर्व सिफारिशों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सभी छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की इजाजत देने से प्रतियोगी परीक्षा का स्तर बढ़ेगा। साथ ही अच्छे डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
लेकिन सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि यह नीतिगत मामला है और यह सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। हालांकि पीठ ने मसले का परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए सुनवाई 10 जुलाई तक के लिए टाल दी थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने ऊपरी आयु सीमा से अधिक वाले अभ्यर्थियों के रिजल्ट जारी करने को लेकर सीबीएसई को किसी तरह का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।
वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए नीट-2018 में ऊपरी आयु सीमा से बड़े छात्रों को बैठने की इजाजत दी थी। पीठ ने कहा कि इन अभ्यर्थियों का रिजल्ट इस मसले के अंतिम आदेश पर निर्भर होगा।
ऐसे में सरकार पर छोड़े गए इस मुद्दे से विवाद दूर नहीं हो सका, अपने-अपने तर्कों से आयु सीमा पर कोई ठोस फैसला भी नहीं हुआ। एक समस्या ऊपरी आयु सीमा के छात्रों का विरोध है तो दूसरा न्यायसंगत प्रतिस्पर्धा। देखना है भविष्य के डॉक्टरों के वर्तमान का क्या हल निकलता है।