दूरसंचार विनिमायक ट्राई नेट निरपेक्षता के संदर्भ में दूरसंचार नेटवर्क पर डाटा ट्रैफिक प्रबंधन (सूचना प्रवाह के प्रबंधन) की व्यवस्था और निरपेक्षता के सिद्धांतों के तहत प्रस्तावित बहु-हितधारक निकाय के ढांचे और उसकी बारीकियों पर परिचर्चा पत्र शीघ्र जारी करेगा।
एक अधिकारी ने बताया कि इन दोनों जुड़े हुए पहलुओं पर परिचर्चा पत्र एक माह के अंदर जारी किया जा सकता है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) इसके आधार पर लोगों से मिली राय पर गौर करने के बाद नियमों के बारे में अपनी सिफारिशों का निर्धारण करेगा।
गौरतलब है कि दूरसंचार विभाग ने नेट निरपेक्षता के सिद्धांतों को हाल में ही मंजूरी दी है। इसके तहत कोई दूरसंचार सेवा प्रदाता इंटरनेट पर किसी सामग्री या सेवा के प्रवाह की रफ्तार के बारे में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं करेगा। यानी दूरसंचार नेटवर्क पर हर प्रकार के डाटा के साथ प्रवाह की गति को लेकर एक जैसा व्यवहार किया जाएगा।
विभाग के तहत काम करने वाले शीर्ष नीतिगत निकाय दूरसंचार आयोग ने ट्राई को नेट निरपेक्षता के सिद्धांतों को लागू करने का अधिकार दिया है। ये सिद्धांत ट्राई द्वारा पहले सुझाए गए नियमों में थोड़े संशोधन वाले हैं।
आयोग ने ट्राई को डाटा प्रवाह प्रबंधन (टीएमपी) के तौर तरीकों पर अपनी सिफारिश प्रस्तुत करने को कहा है। ट्राई से बहु-हितधारक निकाय के स्वरूप, कार्य, भूमिका और दायित्व के निर्धारण के बारे में भी सिफारिश भेजने को कहा गया है। यह निकाय एक तरह की परामर्शदात्री संस्था होगा जो नेट निरपेक्षता के नियमों को लागू करने और उनकी निगरानी के मामले में दूरसंचार विभाग की मदद करेगा।
ट्राई ने नवंबर 2017 में कहा था कि सरकार को नेट निरपेक्षता के नियम लागू करने और उनकी निगरानी का काम खुद करने के साथ-साथ एक ऐसी साझी व्यवस्था भी करनी चाहिए जिससे डाटा प्रवाह प्रबंधन, वैकल्पिक छूटों को लागू करने और पारदर्शिता के उपायों एवं अन्य पहलुओं पर उन सभी पक्षों का ज्ञान बढ़े जिनके हित इस क्षेत्र से जुड़़े हैं।
इसके लिए एक बहु हितधारक निकाय बनाने का सुझाव है। यह निकाय डाटा प्रवाह प्रबंधन के तौर तरीकों की निगरानी और भेदभाव मुक्त व्यवहार को लागू करने के लिए तकनीकी मानकों का विकास करेगी। विभाग ने अब दूरसंचार लाइसेंस में नेट निरपेक्षता के सिद्धांतों का अनुपालन करने की शर्त भी लागू कर दी है।