नए नियमों से अन्य एजेंसियों को भी मौका मिलेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और रेटिंग अधिक सटीक होगी। मंत्रालय ने लोगों और संबंधित पक्षों से 30 अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टीवी रेटिंग एजेंसियों के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है, ताकि अधिक कंपनियां टीवी दर्शकों की संख्या माप सकें। अभी केवल ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ही यह काम करती है। नए नियमों से अन्य एजेंसियों को भी मौका मिलेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और रेटिंग अधिक सटीक होगी। मंत्रालय ने लोगों और संबंधित पक्षों से 30 अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा नियम 2014 के हैं, जो अब पुराने हो चुके हैं। भारत में करीब 23 करोड़ घरों में टीवी है, लेकिन केवल 58,000 घरों से डाटा लिया जाता है, जो बहुत कम है। यह डाटा देश के अलग-अलग क्षेत्रों और लोगों की पसंद को पूरी तरह नहीं दर्शाता। साथ ही, स्मार्ट टीवी, मोबाइल एप और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जैसे नए माध्यमों को मौजूदा सिस्टम पूरी तरह माप नहीं पाता जबकि मोबाइल पर ही सबसे ज्यादा कार्यक्रम देखे जा रहे हैं।
हटाए गए सख्त नियम
प्रस्तावित बदलावों में रेटिंग एजेंसियों और मीडिया कंपनियों के बीच शेयर होल्डिंग की सीमा जैसे कुछ सख्त नियम हटा दिए गए हैं। इससे नई कंपनियां इस क्षेत्र में आ सकेंगी। साथ ही, एजेंसियों को ऐसी सलाहकारी सेवाएं देने से रोका गया है, जो उनके रेटिंग कार्य में बाधा डाल सकती हैं। नए नियमों से टीवी रेटिंग तकनीक और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ेगा, जिससे दर्शकों की बदलती आदतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। इन सुधारों को टीवी रेटिंग को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम माना जा रहा है। मंत्रालय का मानना है कि इससे दर्शकों की पसंद को सही तरीके से मापा जा सकेगा। इससे प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं को लाभ होगा।