कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन का असर लोगो के खाने पीने की वस्तुओं पर भी नजर आ रहा है। पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम और मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा लागत होने से भी महंगाई बढ़ी है। इससे एक तरफ तो ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ी है, तो दूसरी ओर कंपनियां बढ़ती लागत का भार ग्राहकों पर भी डाल रही हैं।
राज्यों में लगे लॉकडाउन के कारण अधिकांश तेल की मिले बंद रही और इस दौरान विदेशों से भी खाने के तेल का आयात घटा है। महामारी की वजह से मिलों में काम करने वाले मजदूर कम रहे और मिलों में गेहूं की आवक घटी, जिससे डिमांड के हिसाब से सप्लाई नहीं हो पाई। जिसके कारण आटे के भाव में वृद्धि हुई है।
कोरोना संकट के बीच खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के बाद अब अमूल ने दूध की कीमतों में भी इजाफा कर दिया है। अब लोगों को दूध के लिए भी पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। बुधवार को अमूल ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। देशभर में एक जुलाई से अमूल दूध दो रुपए महंगा मिलेगा।
अमूल के एमडी डॉ. आरएस सोढ़ी ने कहना है कि, खाद्य महंगाई बढ़ने से दूध की कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था। पैकेजिंग की लागत भी 30 से 40 फीसदी बढ़ गई है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (परिवहन लागत) में भी 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इसके अलावा एनर्जी कॉस्ट भी 30 फीसदी बढ़ गई है।
उन्होंने आगे कहा कि इन सब चीजों के महंगे होने के कारण इनपुट कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हुई है। दूध की कीमतों बढ़ने के बाद पनीर, मक्खन, घी, छाछ, लस्सी, आइसक्रीम के दाम में भी इजाफा हो सकता है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा जिसे इन चीजों के लिए अब पहले से ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी।
इधर, मौसम अनुकूल न होने और कोरोना वायरस संक्रमण संकट की वजह से असम में चाय का उत्पादन भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसलिए इसके चलते भाव में सालाना आधार पर करीब 25 फीसदी बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, जुलाई में चाय का उत्पादन बढ़ने के बाद इसके दामों में कमी आने की उम्मीद है।