सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले और आजीविका प्रदान करने वाले उद्योग को केवल पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) प्राप्त नहीं करने की तकनीकी अनियमितता के आधार पर बंद नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 पूर्व-पश्चात पर्यावरणीय मंजूरी पर रोक नहीं लगाता है।
पीठ ने कहा, यदि ऐसी परियोजनाएं पर्यावरण संबंधी मानदंडों का पालन करती हैं तो अदालत अर्थव्यवस्था या परियोजना में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों और परियोजना पर निर्भर लोगों की आजीविका की रक्षा करने की आवश्यकता से बेखबर नहीं हो सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता है कि ईसी प्राप्त करने की आवश्यकता का अनुपालन करने के मामले में समझौता नहीं हो सकता है।
पीठ ने कहा, भविष्य की पीढ़ियों की रक्षा के लिए और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि प्रदूषण कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। किसी भी परिस्थिति में प्रदूषण करने वाले उद्योगों को अनियंत्रित रूप से संचालित करने और पर्यावरण को खराब करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय हरित अधिकरण के उस आदेश को खारिज करते हुए की जिसमें हरियाणा में उन उद्योगों को बंद करने का निर्देश दिया गया था, जिनके पास पूर्व ईसी नहीं था।