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इंद्रेश कुमार बोले: साइबर सुरक्षा के प्रति देशवासियों को जागरूक होने की जरूरत, CAA पर कही यह बात

Sat, 06 Aug 2022 08:00 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंद्रेश कुमार ने कहा कि आर्थिक युद्ध में चीन से उत्पादित सामानों पर और उसको कच्चा माल देने के मामले में सख्ती और प्रतिबंध जैसे कदमों से काबू पाया गया है। उसे राष्ट्रीय राजमार्ग व रक्षा के साथ दूरसंचार प्रोजेक्ट से बाहर किया गया है। इसलिए हम चीन के चंगुल में आकर श्रीलंका जैसी दिवालिया होने की स्थिति से तो बच गए, पर साइबर युद्ध पर काबू पाना अभी जारी है। 
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इंद्रेश कुमार। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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साइबर सुरक्षा के प्रति देशवासियों को जागरूक होने की जरूरत है। इसको अनदेखा नहीं कर सकते। इसलिए इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहीं। वह जनपथ मार्ग स्थित अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र  में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (फैंस) द्वारा साइबर युद्ध आधारित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 

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ताइवान पर चीन के कड़े रुख को लेकर लेकर उन्होंने कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा शत्रु है। इसके खिलाफ देशवासियों को एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि ताइवान और नेपाल पर कब्जा करने के बाद चीन भारत की ओर रुख करेगा। अगर भारत उसका गुलाम हुआ तो वह ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगलों से भी ज्यादा खतरनाक स्थिति होगी। उससे देश को आजाद होने में दो हजार साल से अधिक का वक्त लग जाएगा। 

उन्होंने कहा कि चीन की विस्तारवादी नीतियां जारी है। भारत की सख्त आपत्तियों के बावजूद अपने लोगों की रक्षा के नाम पर लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के नजदीक पाकिस्तान की सीमा में अपने सैनिकों की मौजूदगी कर ली है। जिससे जम्मू कश्मीर तक हमला आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उसका भारत के खिलाफ आर्थिक और साइबर युद्ध के साथ प्रोपोगंडा युद्ध जारी ही है। यह युद्ध एक साथ कई मोर्चे पर लड़ी जा रही है। 
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इंद्रेश कुमार ने कहा कि आर्थिक युद्ध में चीन से उत्पादित सामानों पर और उसको कच्चा माल देने के मामले में सख्ती और प्रतिबंध जैसे कदमों से काबू पाया गया है। उसे राष्ट्रीय राजमार्ग व रक्षा के साथ दूरसंचार प्रोजेक्ट से बाहर किया गया है। इसलिए हम चीन के चंगुल में आकर श्रीलंका जैसी दिवालिया होने की स्थिति से तो बच गए, पर साइबर युद्ध पर काबू पाना अभी जारी है। 

उन्होंने कहा कि देश में नफरत का माहौल तैयार करने के लिए मुस्लिम समाज को भड़काने, कोरोना के वक्त गरीब मजदूरों के पलायन के मामले में उन्हें भड़काने तथा गांव और शहर को आपस में लड़वाने जैसे मामले देखे गए, जिसमें उसे यहां के लोगों का भी साथ मिला। अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, नाइजीरिया व कनाडा जैसे देशों से इंटरनेट आधारित मीडिया के माध्यम से देश का माहौल खराब करने वाले पोस्ट किए जा रहे हैं। 

संघ प्रचारक ने कहा कि आगे यह हमले और बढ़ेंगे। इसके लिए मजबूती से कमर कसना होगा। देश के लोगों के साथ देश को इन साइबर अपराधों से बचाने के लिए बड़ी संख्या में "साइबर संग्राम सेनानी" की आवश्यकता होगी, इसके लिए विशेषज्ञों के साथ युवाओं को आगे आना होगा।

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