इंडिगो में हाल के दिनों में हुई बड़ी उड़ान गड़बड़ियों को लेकर देश के जाने-माने एविएशन विशेषज्ञ और लो-कॉस्ट एयरलाइन मॉडल के जनक कैप्टन गोपीनाथ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनके मुताबिक यह पूरा संकट इसलिए इतना बढ़ा क्योंकि इंडिगो ने समय रहते हालात को पढ़ने में गलती की और भीतर कहीं अत्यधिक आत्मविश्वास और घमंड हावी हो गया।
कैप्टन गोपीनाथ ने बताया कि 1 नवंबर से लागू हुए FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस) के दूसरे चरण को लागू करने में एयरलाइन ने सही योजना नहीं बनाई। नई नियमावली के कारण पायलटों की उपलब्धता कम हो गई, लेकिन इसके बावजूद इंडिगो ने उड़ानों की संख्या कम नहीं की। उनका कहना है कि यह संकट 2 दिसंबर से दिखाई देने लगा और देखते ही देखते बेकाबू हो गया।
कंपाउंड हुआ और सुनामी बन गया संकट
गोपीनाथ ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि इंडिगो समय रहते वास्तविकता से नहीं जुड़ पाया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा संकट था जो पहले गड़बड़ी बना, फिर जमा होता गया और अंत में सुनामी बन गया। कहीं न कहीं घमंड, जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास ने हालात बिगाड़ दिए। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने उन संकेतों को पढ़ने में गलती की, जो साफ तौर पर दिख रहे थे।
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पायलटों और स्टाफ की आवाज अनसुनी
कैप्टन गोपीनाथ के अनुसार एयरलाइन का फोकस जब बहुत अधिक मुनाफे, रेवेन्यू और शेयर मार्केट की ओर चला जाता है, तब कई बार प्रबंधन अपने पायलटों और कर्मचारियों की बात सुनना बंद कर देता है। उन्होंने कहा कि अगर इंडिगो टिकट बेचने से पहले उड़ानों की संख्या कम कर देता, तो हालात इतने खराब नहीं होते।
डीजीसीए की भूमिका और जरूरी सुधार
संकट के बाद डीजीसीए ने इंडिगो को अपने विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत उड़ानें कम करने का निर्देश दिया है ताकि संचालन स्थिर हो सके। कैप्टन गोपीनाथ ने कहा कि डीजीसीए को पूरी तरह स्वतंत्र रेगुलेटर होना चाहिए, जहां न कोई राजनीतिक दबाव हो और न ही किसी तरह की कृपापात नीति। उन्होंने कहा कि एक सख्त और निष्पक्ष नियामक ही उद्योग को स्थिर रख सकता है।
हालात की आलोचना करने के बावजूद गोपीनाथ ने यह भी कहा कि दुनिया में कई एयरलाइनों के बंद होने के उदाहरण हैं और ऐसे माहौल में इंडिगो का 400 से ज्यादा विमान तक पहुंचना और समयपालन के मानकों में आगे रहना एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह के संकट बताता है कि तेजी से बढ़ने के साथ सही अनुमान, सही प्लानिंग और स्टाफ की आवाज सुनना कितना जरूरी है।
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