हेपेटाइटिस के सुपर संक्रमण को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों का शोध कामयाब हुआ है। उन्होंने इसका स्वदेशी टीका विकसित किया, जो परीक्षण में बंदरों पर असरदार मिला। एक साथ कई तरह के हेपेटाइटिस पर काम करने वाले इस टीके का परीक्षण अध्ययन मेडिकल जर्नल वैक्सीन में प्रकाशित हुआ।
नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने हेपेटाइटिस ई और बी वायरस के खिलाफ संयुक्त लिपोसोम-आधारित टीका तैयार किया है। शोधकर्ताओं ने टीके पर अनुसंधान जारी रखने की सिफारिश भी की है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अभी तक भारत में हेपेटाइटिस बी का टीका है जो 2012 से राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के जरिये पेंटावैलेंट नामक टीके के रूप में दिया जाता है। हालांकि, हेपेटाइटिस ई या कहें कि हेपेटाइटिस बी और सी वाहकों को ई संक्रमण से बचाने के लिए कोई टीका नहीं है। यही कारण है कि हमने हेपेटाइटिस ई का एक प्रभावी टीका विकसित किया है। इसका उपयोग गर्भावस्था के दौरान और हेपेटाइटिस बी व सी वाहकों के लिए किया जा सकता है।
देखा जाता है महामारी के रूप में
सिरोसिस, लिवर कैंसर जैसी बीमारियों की वजह
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हेपेटाइटिस बी से भारत में लगभग चार करोड़ लोग प्रभावित हैं। वहीं, हेपेटाइटिस सी से करीब एक करोड़ लोग प्रभावित हैं। हेपेटाइटिस से संबंधित मौतों में से लगभग 95 फीसदी सिरोसिस और बाकी पांच फीसदी लिवर कैंसर से हो रही हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल हेपेटाइटिस ई से पीड़ित 10 से 15 फीसदी मरीज लिवर फेलियर की चपेट में आते हैं।
सुपर संक्रमण घातक
कोरोना का एक और स्वदेशी टीका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंजूर
भारत के एक और कोरोना रोधी स्वदेशी टीका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मंगलवार को हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई कंपनी ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने उनके कोर्बेवैक्स टीका को आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) में शामिल किया है। यह टीका भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित कोविड-19 टीका है जो प्रोटीन सब-यूनिट प्लेटफॉर्म पर आधारित है। कंपनी की प्रबंध निदेशक महिमा दतला ने बताया कि डब्ल्यूएचओ का यह समर्थन कोविड-19 के खिलाफ हमारी वैश्विक लड़ाई को मजबूत करेगा।