केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़े बयान में कहा कि कथित जासूसी के बारे में रिपोर्ट को कुछ लोगों ने आगे बढ़ाया है जिनका एकमात्र उद्देश्य विश्व स्तर पर भारत को अपमानित करने के लिए हर संभव प्रयास करना है। शाह ने कहा, ‘यह विघटनकारियों की अवरोधकों के लिए रिपोर्ट है। विघटनकारी वैश्विक संगठन हैं जो भारत की प्रगति को पसंद नहीं करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अवरोधक भारत में राजनीतिक खिलाड़ी हैं जो नहीं चाहते कि भारत उन्नति करे। भारत के लोग इस ‘क्रोनोलॉजी’ और संबंध को अच्छे से समझते हैं।’
कांग्रेस के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी का भी मोबाइल नंबर निशाने पर
न्यूज पोर्टल ने अपने पड़ताल के नए भाग को जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कम से कम दो मोबाइल फोन नंबरों को 'इस्राइल के निगरानी प्रौद्योगिकी विक्रेता समूह एनएसओ के एक आधिकारिक भारतीय ग्राहक द्वारा संभावित लक्ष्य के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल की तकनीकी लैब द्वारा इस सूची से लिए गए फोन के क्रॉस-सेक्शन के फोरेंसिक निरीक्षण ने 37 उपकरणों में पेगासस स्पाइवेयर की उपस्थिति की पुष्टि की है, जिनमें से 10 भारत में हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गांधी उन लोगों में शामिल नहीं हैं जिनके फोन नंबरों की जांच की गई क्योंकि उनके पास अब वे हैंडसेट नहीं हैं जिनका इस्तेमाल उन्होंने उस समय किया था जब उनके नंबर को 2018 के मध्य से 2019 के मध्य तक निशाना बनाने के लिये चुना था। रिपोर्ट के अनुसार फॉरेंसिक जांच नहीं होने की सूरत में निश्चित रूप से यह स्थापित करना संभव नहीं है कि पेगासस को गांधी को निशाना बनाने के लिये कहा गया था या नहीं।
पेरिस स्थित एक गैर-लाभकारी मीडिया संगठन और अधिकार समूह एमनेस्टी द्वारा की गई एक जांच रिपोर्ट को भारत में एक न्यूज पोर्टल और कुछ 16 अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों ने मीडिया पार्टनर के रूप में प्रकाशित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है इस्राइली निगरानी कंपनी एनएसओ समूह के पेगासस सॉफ्टवेयर के माध्यम से दुनियाभर से 50 हजार से अधिक फोन नंबरों को निशाना बनाने के लिए सूचीबद्ध किया था। समाचार पोर्टल ने कहा कि गांधी और केंद्रीय मंत्रियों वैष्णव और प्रहलाद सिंह पटेल के अलावा जिन लोगों के फोन नंबरों को निशाना बनाने के लिए सूचीबद्ध किया गया, उनमें चुनाव पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के संस्थापक जगदीप छोकर और शीर्ष वायरोलॉजिस्ट गगनदीप कांग शामिल हैं।
चुनाव के कामकाज से जुड़े कई लोगों की निगरानी के लिए उन्हें निशाने पर रखा गया
रिपोर्ट के अनुसार सूची में राजस्थान की मुख्यमंत्री रहते वसुंधरा राजे सिंधिया के निजी सचिव और संजय काचरू का नाम शामिल था, जो 2014 से 2019 के दौरान केंद्रीय मंत्री के रूप में स्मृति ईरानी के पहले कार्यकाल के दौरान उनके विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) थे। इस सूची में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े अन्य जूनियर नेताओं और विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया का फोन नंबर भी शामिल था। समाचार पोर्टल ने कहा कि सूची से पता चलता है कि चुनाव के कामकाज से जुड़े कई लोगों को भी संभावित निगरानी के लिए निशाने पर रखा गया था, जिसमें लवासा भी शामिल हैं। लवासा तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के एकमात्र सदस्य थे, जिन्होंने इस बात को माना था कि 2019 के आम चुनाव के लिए प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था।
देश की लोकतांत्रिक नींव पर हमला
गांधी ने समाचार पोर्टल को बताया कि उन्हें अतीत में संदिग्ध व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए थे और वह समय समय पर नंबर बदलते रहते थे, जिससे उन्हें निशाना बनाना 'उनके लिए थोड़ा मुश्किल' हो जाता था। इस खबर पर उनकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर गांधी ने द वायर से कहा, 'लक्षित निगरानी जिसके बारे में आप बता रहे हैं, वह मेरे संबंध में या विपक्ष के अन्य नेताओं या कानून का पालन करने वाले किसी अन्य भारतीय नागरिक के संबंध में अवैध और निंदनीय है।' कांग्रेस के पूर्व प्रमुख ने कहा, 'यदि आपकी सूचना सही है, यह मामला किसी व्यक्ति की गोपनीयता पर हमले से भी कहीं अधिक है। यह हमारे देश की लोकतांत्रिक नींव पर हमला है। इसकी पूरी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान करक उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।'