यूक्रेन में पढ़ रहे छात्र पिट्ठू बैग में एक-दो कपड़े रखकर कीव से निकलकर ट्रेन से रोमानिया सीमा के पास पहुंचे हैं, लेकिन वहां से आगे का रास्ता नजर नहीं आ रहा है। जयंत और स्नेहा भाई-बहन हैं। इनके साथ इनकी अहमदाबाद की सहपाठी क्रीमा गांधी भी हैं। सभी मेडिकल की पढ़ाई करने गए थे। बताते हैं कि रोमानिया की सीमा से तीन किमी दूर हैं। उनके पास न खाने को बचा है और न ही कपड़े। रोमानिया की सीमा के पास का तापमान कोई 15 डिग्री सेल्सियस है। जयंत बताते हैं कि यूक्रेन की राजधानी कीव जो कभी देखने में बहुत खूबसूरत थी, वहां अब केवल तबाही का मंजर दिखाई देता है।
जयंत, स्नेहा के पिता बीबी शर्मा दिल्ली, नोएडा की सीमा पर स्थित ईस्ट एंड अपार्टमेंट में रहते हैं। बीबी शर्मा को आपदा प्राधिकरण, और सरकार की कुछ एजेंसियों से लगातार बच्चों को सकुशल पहुंचाने के फोन आ रहे हैं। बीबी शर्मा की परेशानी यही है कि पिछले दो दिन से तीनों बच्चे रोमानिया की सीमा के पास अटके पड़े हैं।
छात्रों ने की सहायता, अपनी बस में बिठाया
जयंत ने बताया कि ट्रेन से उतरने के बाद तीनों छात्र पैदल ही रोमानिया बार्डर की तरफ चले जा रहे थे, लेकिन 300 भारतीय छात्रों से भरी बसों के काफिले ने इन तीन छात्रों की मदद की। उन्हें बस में बिठाकर ठंड से बचाया है। स्नेहा और जयंत बताते हैं कि यूक्रेन में इतने तनाव के बाद जहां हर छात्र अपने देश लौटने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं संकट में फंसे छात्र और लोग एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं। छात्रों की भी मदद कर रहे हैं।