इसी विश्वविद्यालय में एमएससी कंप्यूटर विज्ञान की पढ़ाई कर रहे अलीगढ़ के ओवैस आर खान बताते हैं कि वह फरवरी में भारत आए थे, जब दोनों देशों में हालात अपेक्षाकृत बेहतर थे। उन्होंने कहा,‘‘अचानक मेरे लौटने के कार्यक्रम से एक हफ्ता पहले स्थिति नारकीय हो गई। इटली ने यात्रा प्रतिबंध लगा दिए जो अब भी लागू हैं। मेरे विश्वविद्यालय में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से परीक्षा हो रही है। हमने दूतावास से संपर्क किया, हम इटली के समक्ष मुद्दा उठाने के लिए मंत्रालय को ई-मेल भेज रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा हैं।’’
खान ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि हम एक चक्रव्यूह में फंस गए हैं। पिछले साल मैं इटली में फंस गया था, तब यहां परिवार चिंतित था। एक साल बाद वहीं स्थिति भारत में हुई और हमने खुद को उसी स्थिति में दोबारा पाया। उस स्थिति से निपटना मुश्किल होता है, जब परिवार का कोई सदस्य चला जाता है और अंतिम संस्कार की भयावह यादें दिमाग में घूमती रहती है।’’
निवास परमिट में भी आ रही दिक्कत
विटा सैल्यूट सैन राफेल विश्वविद्यालय में एमएमबीएस के छात्र निहाल विक्रम सिंह की समस्या यात्रा में देरी ही नहीं है, बल्कि निवास परमिट और भारतीय टीके को मान्यता नहीं देना भी है। उन्होंने कहा, ‘‘निवास परमिट के अनुसार हम छह महीने से अधिक समय तक इटली से बाहर नहीं रह सकते। इसके साथ ही मैं चिकित्सा का छात्र हूं, सिद्धांत संबंधी पाठ्यक्रम की कक्षाएं तो ऑनलाइन हो रही हैं लेकिन मेरे पाठ्यक्रम के लिए यह पर्याप्त नहीं है।’’
सरकार कर रही प्रयास
इस बीच इटली में भारत की राजदूत डॉ.नीना मल्होत्रा ने 9 जुलाई को समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और रियायत की मांग को लेकर दूतावास द्वारा किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।