भारत के पहले ह्यूमन गगनयान मिशन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसरो इसके लिए अपने चार ट्रेंड पायलटों में से दो को ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजेगा। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इन एस्ट्रोनॉट्स को गगनयान मिशन के लिए तैयार करेगी और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के मॉड्यूल में रहने के तौर-तरीके सिखाएगी। वहीं गगनयान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए ड्रोग पैराशूट की जरूरत होगी। खास बात यह होगी कि ये पैराशूट्स पूरी तरह से स्वदेशी होंगे। ये पैराशूट लगभग बन कर तैयार हैं।
हजरतपुर ऑर्डिनेंस इक्विपमेंट्स फैक्टरी में बन रहे पैराशूट
सरकार की महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ़ाते हुए, भारत का पहला मानवयुक्त स्पेस एक्सप्लोरेशन गगनयान मिशन अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए स्वदेशी ड्रोज पैराशूट का उपयोग करेगा। इन पैराशूट्स को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में हजरतपुर स्थित ऑर्डिनेंस इक्विपमेंट्स फैक्टरी में बनाए जा रहा है। इन पैराशूट्स को इस्तेमाल रप्तार करम करने और तेजी से चलती वस्तुओं को स्थिर करने के लिए किया जाता है। इन ड्रोज पैराशूट्स का इस्तेमाल अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लाने के लिए किया जाएगा।
5,000 घंटे में बनती है एक पैराशूट कैनोपी
सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 28 पैराशूट सेट का ऑर्डर दिया है। इनमें से 12 इसरो को मिल चुके हैं और बाकी का काम अगले महीने पूरा हो जाएगा। 5.8 मीटर व्यास वाले ये कॉनिकल रिबन-प्रकार के पैराशूट, कैनोपी मेकेनिक्स को न्यूनतम करने और खुलने पर पैदा होने वाले झटकों को कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे उतरने में आसानी हो। वहीं एक पैराशूट कैनोपी बनाने में कम से कम 5,000 घंटे की मेहनत लगती है। गगनयान मिशन के लिए चार प्रकार के पैराशूट का उपयोग किया जाएगा। इनमें रिंग स्लॉट - एपेक्स कवर सेपरेशन (एसीएस) कैनोपी, ड्रोज पैराशूट - कॉनिकल रिबन कैनोपी, पायलट पैराशूट - रिंग स्लॉट कैनोपी, और मुख्य कैनोपी - सर्कुलर स्लॉटेड होते हैं।
नायलॉन से बने हैं पैराशूट
सूत्रों ने बताया कि 250 डिग्री सेल्सियस का तापमान झेलने वाले नायलॉन 66 जैसे विशेष कपड़े से बने हैं। डीआरडीओ और इसरो ने इन ड्रोज पैराशूट को डिजाइन और विकसित किया है। मिशन में इस्तेमाल किए जाने वाले पैराशूट के बारे में सूत्रों ने बताया कि यह 10 पैराशूटों का एक ग्रुप है। जब अंतरिक्ष यात्रियों वाला कैप्सूल पृथ्वी से 7 किलोमीटर की दूरी (ऊंचाई) पर पहुंचता है, तो वे काम करना शुरू कर देते हैं। दो एपेक्स कवर सेपरेशन (एसीएस) पैराशूट कैप को खींचकर दो ड्रोज पैराशूट को खोल देंगे, जिससे रफ्तार कम हो जाएगी, जो 190 मीटर प्रति सेकंड (11.4 किमी प्रति मिनट) तक पहुंच जाएगी। इसके बाद, तीन पायलट पैराशूट उतरने की रफ्तार को 10/12 मीटर प्रति सेकंड (600/720 मीटर प्रति मिनट) तक ले कर आएगा। पायलट पैराशूट मुख्य कैनोपी को खोलने के लिए बटन के रूप में कार्य करता है, जिनकी संख्या तीन होती है। प्रत्येक कैनोपी लगभग 1,000 किलोग्राम तक का भार झेल सकती है। इस प्रकार मुख्य पैराशूट प्रणाली में तीन कैनोपी कुल 3,000 किलोग्राम भार वहन कर सकती हैं।