कोरोना वायरस की तरह अब मंकीपॉक्स के संक्रमण की स्वदेशी जांच तकनीक मिल गई है। आईसीएमआर के अधीन पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक कलरिमेट्रिक इजोटेर्मल (एलएएमपी) टेस्ट विकसित किया है। यह तकनीक महज चंद मिनट में न सिर्फ मंकीपॉक्स वायरस की पहचान करने में सक्षम है, बल्कि मरीज की रिपोर्ट भी समय रहते प्राप्त हो सकती है। इसे लैंप तकनीक नाम दिया है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि इसमें विशेष तरह के कागज का इस्तेमाल किया जाता है जो वायरस पॉजीटिव होने पर गुलाबी से पीले रंग में बदल जाता है। यह जांच प्रयोगशाला से बाहर कहीं भी और किसी भी वक्त की जा सकती है। इसमें महज 40 मिनट का समय लगता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि इसे पेटेंट करा लिया गया है और जांच किट बनाने के लिए प्राइवेट कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं।
आरटी पीसीआर जैसे रिजल्ट दे रही स्वदेशी तकनीक
एनआईवी के वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना महामारी में आरटी पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल किया गया क्योंकि वायरस बार-बार अपना स्वरूप बदल रहा है। इसकी जब लैंप से तुलना की गई तो यह उतनी ही असरदार साबित हुई। गुणवत्ता के लिए एनआईवी की टीम ने समीक्षा अध्ययन भी किया है।
- टीम ने बताया कि यह पूरा अध्ययन एक बीएसएल 4 श्रेणी की प्रयोगशाला में किया गया जो मंकीपॉक्स को लेकर भारत की इकलौती प्रयोगशाला है। इस दौरान करीब 160 नमूनों का इस्तेमाल किया गया जो मरीजों की नाक से लिए गए।
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