एक के बाद एक स्कूलों से बच्चों की हत्या और यौन शोषण की आती खबरों के बाद दिल्ली एनसीआर के अभिभावक गुस्से मे हैं। गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल में 7 साल के प्रद्युम्न की हत्या के बाद खबर दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके के टैगोर पब्लिक स्कूल से आई है जहां स्कूल के सिक्योरिटी गार्ड ने पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म किया है। मामला शनिवार का है। बच्ची के साथ शोषण की पुष्टि भी हो गई है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है। लेकिन बच्चों की सुरक्षा का मामला सरकारी से गैर सरकारी स्कूलों तक जस का तस बना हुआ है।
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प्रद्युम्न की हत्या हो या कृष्णा नगर की बच्ची के साथ दुष्कर्म, स्कूल में बच्चों के साथ शोषण का न तो ये पहला मामला है न आखिरी। हर दिन राजधानी एनसीआर के विभिन्न स्कूलों से नौनिहालों की हत्या और शारीरिक शोषण के मामले सामने आने से अभिभावक डरे हुए हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि बार-बार बच्चों के साथ हो रहे शोषण के बाद स्कूल प्रशासन सजग नहीं हो रहा है।
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पिछले महीने अगस्त में गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित जीडी गोयनका स्कूल में अरमान सहगल की मौत की बाद एनसीआर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान लगने लगा था। 2016 में भी वसंत कुंज स्थित रायन स्कूल इंटरनेशल के एक छात्र दिव्यांश की मौत ने भी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाया था।
दिव्यांश के माता पिता ने स्कूल के लाइलेंस कैंसिल करने की मांग की है
दिव्यांश के साथ स्कूल में कुकर्म (अप्राकृतिक कृत्य) की भी आशंका जताई गई थी दिव्यांश के ऐनल प्वाइंट पर रूई लगी थी जबकि दिव्यांश का शव पानी टंकी के पास मिला था। बड़ा सवाल ये था कि दिव्यांश पानी टंकी के पास कैसे पहुंचा और उसके शव को टंकी से कैसे निकाला गया।अब जब रायन स्कूल में एक और बच्चे की हत्या का मामला सामने आया है तब दिव्यांश के माता पिता ने स्कूल के लाइलेंस कैंसिल करने की मांग की है।दिव्यांश के पिता रामहित मीना और मां ममता दोनों ही प्रद्युम्न की हत्या के बाद सदमे में हैं।
फिलहाल प्रद्युम्न के मामले में सरकार, पुलिस और स्कूल प्रबंधन ने कार्रवाई तेज कर दी है। स्कूल प्रबंधन ने कार्यवाहक प्रिंसिपल नीरज बत्रा को निलंबित कर दिया है। जबकि एचआरडी मंत्रालय ने हरियाणा सरकार, स्कूल प्रबंधन और सीबीएसई से भी रिपोर्ट मांगी है लेकिन स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर अभी तक कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है।
देश में 3 में से 2 बच्चे शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं
बच्चों के लिए शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा भी जरूरी है। लेकिन अगर पिछले कुछ दिनों में बच्चों के साथ घट रही घटनाओं पर नजर डालें तो ज्यादातर स्कूल और सरकारों ने इसपर कुछ खास असर होता दिखाई नहीं दे रहा है।
पिछले कुछ महीनों या सालों में बच्चों की सुरक्षा के इंतजामों की कमी के चलते कई नौनिहालों के साथ शारीरिक शोषण और जान तक गई है। बच्चों के साथ बढ़ रहे मामलों पर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने स्कूलों से जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने की गाइड लाइन तक जारी किया है। लेकिन देश के ज्यादातर स्कूलों में सुरक्षा का इंतजाम संतोषजनक नहीं है। सुरक्षा गार्ड तो रखे जा रहे हैं लेकिन उनकी जांच नहीं कर रहे हैं।
सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम और कानून तो कई बनाएं हैं लेकिन सब फाइलो में ही दफन हैं। चाहें वो स्कूल में खेलकूद को लेकर नियम हो या फिर हर स्कूल में सुरक्षित स्थानों का होना या फिर बात करें स्कूलों में बिजली से सुरक्षा व्यवस्था की। हर मामले में निजी स्कूलों से लेकर सरकारी स्कूल का प्रशासन तक नियमों की अनदेखी कर रहा है।
बच्चों के साथ हो रहे शोषण को देखते हुए महिला एवं विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में 3 में से 2 बच्चे शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। जबकि 70 फीसदी मामले सामने भी नहीं आ पाते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग देश के संरक्षित और सुरक्षित स्कूलों पर एक सर्वेक्षण भी करा रहा है। इस सर्वे में देशभर के करीब 80 हजार स्कूलों के करीब 8 लाख छात्रों से बातचीत किए जाने की योजना है।