16 अप्रैल 1853 को भारत की पहली रेल चली थी यह ट्रेन मुंबई से थाणे के बीच चलाई गई थी। भाप से चलती हुई रेलवे अब आधुनिकता के सर्वोच्च स्थान पर पहुंच चुकी है और अब यह कोयला, बिजली को बहुत पीछे छोड़ बिना ड्राइवर के सफर पर निकलने को तैयार है। ट्रेन ने इस बीच कई रूप बदले हैं। मेट्रो और टी 18 इसका आधुनिकतम रूप है। टी 18 ट्रेन लंबी दूरी की बिना इंजन की ट्रेन है जो पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड है। रेलवे की आधुनिकता के बाद अब रेलवे स्टेशन और स्टेशन परिसर के आधुनिक होने का समय आ चुका है।
यह सूचना चौंकाएगी कि पहली ट्रेन 14 बोगी की थी, इस ट्रेन को 3 इंजनों की मदद से चलाया गया था। आज 165 वर्षों बाद देश में बुलेट ट्रेनों को चलाने की तैयारी जोर-शोर से जारी है। भारत एवं जापान के सहयोग से बनने वाली मुंबई - अहमदाबाद हाईस्पीड रेलवे लाइन का निर्माण वर्ष 2017 से ही शुरू हो चुका है। अनुमान है कि वर्ष 2023 के आरंभ में देश की पहली बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेंगी। गाड़ी की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रतिघंटा और वास्तविक गति 320 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी।
स्थिति चिंताजनक: 100 वर्ष पुराने हैं 37 हजार पुल
पिछले दिनों संसद में दी गई एक रेलवे की स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय ट्रेनें रोजाना ऐसे जर्जर पुलों से होकर गुजरती हैं, जिनकी आयु 100 साल से भी अधिक है। ऐसे पुलों की संख्या 37,689 है, जबकि कुल रेल पुलों की संख्या 1 लाख 47 हजार 523 है। यानी कि हर तीसरा पुल 100 साल से भी ज्यादा पुराना है।
तीन कैटेगरी में बांटे गए हैं पुल
इस रिपोर्ट में इन पुलों को यात्रियों के लिए घातक बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रैक के साथ-साथ रेल पुल भी रेल ट्रांसपोर्ट के लिए लाइफ लाइन का काम करते हैं। भारत में एक अप्रैल 2018 तक कुल रेल पुलों की संख्या 147523 थी, जिन्हें तीन कैटेगिरी में बांटा गया है। इनमें 700 बेहद महत्वपूर्ण कैटेगिरी में हैं, जबकि 12,085 पुल बड़े हैं और 13,5738 पुल छोटे हैं।
कमीटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में रेल नेटवर्क 163 साल पुराना है। उसके बाद से नेटवर्क को जोड़ने के लिए रेल पुलों का निर्माण किया गया। इनमें से कुछ पर रेल परिचालन बंद कर दिया गया है, लेकिन अभी भी 37689 पुल ऐसे हैं, जो 100 साल से भी अधिक पुराने हैं।
भारत की पटरियों पर दौड़ने वाली पहली रेल 16 अप्रैल 1853 को चली थी। 14 बोगी की इस ट्रेन को 3 इंजनों की मदद से चलाया गया था। आज 163 वर्षों बाद देश में बुलेट ट्रेनों को चलाने की तैयारी जोर-शोर से जारी है। भारत एवं जापान के सहयोग से बनने वाली मुंबई - अहमदाबाद हाईस्पीड रेलवे लाइन का निर्माण वर्ष 2017 से ही शुरू हो चुका है। अनुमान है कि वर्ष 2023 के आरंभ में देश
की पहली बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेंगी। गाड़ी की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रतिघंटा और वास्तविक गति 320 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी।
सोशल साइट्स और एप बने नए मददगार
समय के साथ-साथ रेल सुविधाओं को सोशल साइट्स और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए समृद्ध करने की कोशिश की जा रही है। पिछले दिनों एक ट्रेन में एक बच्चेके पिता ने ट्वीटर के जरिए विभाग को अपनी परेशानी बताई और विभाग ने उसके लिए ट्रेन में डायपर उपलब्ध कराया। इससे पहले भी युवतियों द्वारा रेलवे एप और ट्वीटर के जरिए चलती ट्रेन में छेड़छाड़ और मारपीट जैसी घटनाओं से मुक्ति पाई है। इसके अलावा सामान्य दर्जे की टिकट के लिए भी घंटों लाइन में खड़े रहने की कवायद से मुक्ति दिलाते हुए उन्हें मोबाइल एप के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा ऑपरेशन फाइव मिनिट्स के तहत देश के कई स्टेशनों में क्वाइन मशीन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
लेकिन यह रेलवे का सच है
क्या आप जानते हैं कि भारतीय रेलें दिन भर में जितनी दूरी तय करती हैं, वह धरती से चांद के बीच की दूरी का लगभग साढ़े तीन गुनी है।
अगर भारतीय रेल की सारी पटरियों को सीधा जोड़ दिया जाए तो उनकी लंबाई पृथ्वी के आकार से भी 1.5 गुना ज्यादा होगी।
देश में छोटे- बड़े करीब 7,500 रेलवे स्टेशन हैं। इन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। कश्मीर में चिनाब नदी पर बनने वाला दुनिया का सबसे ऊंचा पुल नदी के तल से 359 मीटर ऊपर और कुतुब मीनार से पांच गुना ऊंचा होगा।