किंग चार्ल्स तृतीय का ब्रिटिश सम्राट के रूप में पहला जन्मदिन इस साल मनाया जाएगा। इसी को लेकर एक सम्मानित गणों की सूची जारी की गई है, जिसमें 40 से अधिक भारतीय मूल के डॉक्टरों, व्यापारियों और सामुदायिक लोगों के नाम शामिल हैं। सम्मानितों की सूची में डॉक्टर परविंदर कौर एली, प्रोफेसर प्रोकर दासगुप्ता, अनुज चंदे, हिना सोलंकी सहित कई बड़े नाम शामिल हैं। बता दें, राजा के जन्मदिन पर उन लोगों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में उपलब्धियां हासिल की हैं और खुद को ब्रिटेन की सेवा और मदद करने के लिए प्रतिबद्ध किया है।
आइए जानते हैं कि किसे व्यक्ति को किस वजह से सम्मान दिया गया है -
कोरोना महामारी के दौरान अपनी बेहतरीन सेवाओं के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप में ग्लोबल ऑपरेशंस की निदेशक डॉक्टर परविंदर कौर एली को ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (OBE) के एक अधिकारी के रूप में सम्मानित किया गया है।
वहीं, किंग्स हेल्थ पार्टनर्स और चेयर इन रोबोटिक सर्जरी एंड यूरोलॉजिकल इनोवेशन प्रोफेसर प्रोकर दासगुप्ता को भी सर्जरी और विज्ञान की सेवाओं के लिए ओबीई से सम्मानित किया गया है।
ग्रांट थॉर्नटन यूके एलएलपी में साउथ एशिया बिजनेस ग्रुप के प्रमुख अनुज चंदे को भी सम्मानित किया गया है। इन्हें अंतरराष्ट्रीय व्यापार और इसमें निवेश करने के लिए ओबीई दिया गया है।
व्यवसाय और दान सेवाओं के लिए सोल कॉस्मेडिक्स की संस्थापक हिना सोलंकी को ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर के सदस्य के रूप में सम्मानित किया गया है।
वेल्स में महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सेवाओं के लिए सलाहकार प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ अंजू कुमार को भी ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित किया गया है।
लंदन में कानून और व्यवस्था के लिए सेवाओं के लिए जिला क्राउन अभियोजक वरिंदर हायरे और पुनर्जनन सेवाओं के लिए यूके ग्रीन बिल्डिंग्स काउंसिल के अध्यक्ष सुनंद प्रसाद को सम्मान दिया गया।
यह सूची ब्रिटेन सरकार ने शुक्रवार रात लंदन में जारी की। ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री ओलिवर डाउडेन ने कहा कि इस साल की सूची सामान्य लोगों के लिए गर्व की बात है। यह सूची दिखाता है कि कैसे लोगों ने अपनी अच्छी भावनाओं का प्रदर्शन किया है। डाउडेन ने कहा कि आज इस सूची में जिन भी लोगों का नाम शामिल है, मैं उन सभी का सम्मान करता हूं। बता दें, कुल 1,171 लोगों को सम्मान मिला है, जिनमें से 52 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपने समुदायों में या तो स्वैच्छिक या दान करके अच्छा काम किया है। वहीं, 11 प्रतिशत जातीय अल्पसंख्यक से हैं।
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