भारतीय नौसेना छह मई को अपने मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत आईएनएस रंजीत को सेवा मुक्त कर देगी। इस युद्धपोत को 15 सितंबर 1983 को नौसेना में शामिल किया गया था। यह सोवियत संघ के काशिन क्लास द्वारा निर्मित पांच में से तीसरा विध्वंसक था। इसने नौसेना को 36 सालों तक अपनी सेवा दी है।
इस जहाज को अब विशाखापट्टनम के नेवल डॉकयार्ड में समारोह का आयोजन करके सेवा मुक्त किया जाएगा। इस समारोह में वह अधिकारी शामिल होंगे जिन्होंने अतीत में आईएनएस रंजीत पर काम किया है और वह अधिकारी, नाविक भी शामिल होंगे जो कमीशन क्रू का हिस्सा हैं।
यूक्रेन के निकोलेव शहर में आईएनएस रंजीत का निर्माण 61 कम्यूनिटी शिपयार्ड में यार्ड 2203 के रूप में किया गया था। इस जहाज की नींव 29 जून 1977 को रखी गई थी और इसे 16 जून 1979 को लॉन्च किया गया था।
राष्ट्र के प्रति दी गई अपनी गौरवपूर्ण सेवा में इस जहाज के कई कमांडर भारतीय नौसेना के एडमिरल भी बने हैं। इस जहाज का 27 बार कमीशन दिया गया है। आखिरी बार 6 जून 2017 को इसका कमीशन दिया गया था। छह मई को सूर्यास्त के साथ इस जहाज को विदाई दी जाएगी।