फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंद महासागर में चीन-पाक को मात देगा भारत, छह नई परमाणु पनडुब्बियों को करेगा शामिल

Fri, 21 Feb 2020 06:19 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
पनडुब्बी INS खंडेरी - फोटो : social media
विज्ञापन

चीन और पाकिस्तान की ओर से हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपनी रक्षा तैयारियों को तेज कर दिया है। नौसेना की ताकत में इजाफा करने के लिए भारत छह परमाणु शक्ति चलित पनडुब्बियों को नौसेना में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। 1.2 लाख करोड़ के इस सौदे को जल्द ही सरकार की तरफ से मंजूरी दी जा सकती है। 

विज्ञापन


इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के तहत नौसेना के लिए परमाणु शक्ति से संपन्न छह पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा जो पारंपरिक हथियारों जैसे तारपीडो और मिसाइलों से लैस होगी। अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि इन पनडुब्बियों से परमाणु मिसाइलें दागी जाएंगी या नहीं। 

नौसेना डिजाइन निदेशालय को सहयोग देगा डीआरडीओ
सूत्रों के अनुसार, अगर सबकुछ पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार चलता रहा तो अगले 10 सालों में ये पनडुब्बियां भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएंगी। इस परियोजना के प्रारंभिक डिजाइन वाले चरण को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। डीआरडीओ के सहयोग से नौसेना डिजाइन निदेशालय अब इन पनडुब्बियों की जटिल और विस्तृत डिजाइन को तैयार करने की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन


2015 में मोदी सरकार ने इस परियोजना को दी थी मंजूरी
साल 2015 में मोदी सरकार ने भारतीय नौसेना के लिए लंबित परियोजना को आगे बढ़ाते हुए छह परमाणु शक्ति चलित अटैक पनडुब्बियों (एसएसएन) के निर्माण को मंजूरी दी थी। इन पनडुब्बियों को  विशाखापत्तनम में शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाया जाएगा। हालांकि यहां पहले से ही अरिहंत श्रेणी की एक अन्य पनडुब्बी का निर्माण किया जा रहा है। 

दो परमाणु शक्ति समेत 15 पनडुब्बियों का संचालन कर रही नौसेना

पनडुब्बी INS खंडेरी - फोटो : social media
भारतीय नौसेना इस समय कुल 15 पनडुब्बियों का संचालन कर रही है जिसमें आईएनएस अरिहंत और आईएनएस चक्र परमाणु शक्ति संचालित हैं। आईएनएस चक्र को रूस से 10 साल की लीज पर लिया गया है जबकि अरिहंत का निर्माण भारत में ही किया गया है। ये दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल हमले को अंजाम दे सकती हैं।

इस परियोजना में भारत को अरिहंत के निर्माण से जुड़े अनुभव काम आएंगे। एसएसएन श्रेणी की ये पनडुब्बियां ज्यादा गहराई तक गोता लगाने में सक्षम होंगी। जबकि इनके सोनार और रडार पहले की तुलना में ज्यादा एडवांस होंगे। उर्जा को पैदा करने के लिए इन पनडुब्बियों में नवीन तकनीकी वाले परमाणु रिएक्टर लगाए जाएंगे।
विज्ञापन

वर्तमान में ये पनडुब्बियां भारतीय नौसेना में हैं कार्यरत

पनडुब्बी - फोटो : पेक्सेल्स
पनडुब्बी कमीशन की तिथि श्रेणी
आईएनएस अरिहंत (परमाणु) अगस्त 2016 अरिहंत क्लास
आईएनएस चक्र (परमाणु) 4 अप्रैल 2012 अकूला क्लास
आईएनएस कलवारी 14 दिसंबर 2017 स्कॉर्पियन क्लास
आईएनएस सिंधुघोष 30 अप्रैल 1986 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुराज 20 अक्टूबर 1987 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुवीर 26 अगस्त 1988 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुरत्न 22 दिसंबर 1988 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुकेसरी 16 फरवरी 1989 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुकीर्ति 4 जनवरी 1990 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुविजय 8 मार्च 1991 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुशस्त्र 19 जुलाई 2000 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस शिशुमार 22 सितंबर 1986 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस संकुश 20 नवंबर 1986 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस शल्की 7 फरवरी 1992 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस संकुल 28 मई 1994 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें