नौसेना के गोताखोरों ने उस बस को खोज निकाला है जो मुंबई-गोवा हाईवे पर महाड में सावित्री नदी पर बने पुल के टूटने से तेज धारा में बह गई थी। यह हादसा दो अगस्त को ब्रिटिश कालीन निर्मित महाड पुल के ढह जाने के कारण हुआ था।
इस दुर्घटना में राज्य परिवहन (एसटी) की दो बस और कार सहित 42 लोग बह गए थे। नौसेना के प्रवक्ता राहुल सिंहा ने कहा कि बीते आठ दिन से प्रतिदिन 12 से 14 घंटे तक खोज में जुटे रहने के बाद नौसेना के दल को महाड़ में डूबी दो बसों के अवशेष मिल गए हैं। उन्होंने बताया कि उफनती नदी और इसमें मगरमच्छों की मौजूदगी के बावजूद जगह-जगह खोज जारी थी।
बसों के अवशेष हादसा स्थल से लगभग 170 से 200 मीटर की दूरी पर मिले हैं। लेकिन, बस में किसी के शव नहीं पाए गए हैं। उफनती नदी और इसमें मगरमच्छों की मौजूदगी के बावजूद जगह-जगह खोज जारी थी।
नौसेना के प्रवक्ता ने कहा है कि बस के अवशेष का पता चलने के बाद राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के दल को सूचित किया गया। उसके बाद कई क्रेन और जेसीबी की सहायता से चार घंटे की मशक्कत से बस के अवशेष को बाहर निकाला गया।
दो अगस्त की मध्यरात्रि पुल टूटने से हुई इस दुर्घटना में दो एसटी की बस समेत एक टवेरा और एक कार सहित कुल 42 लोगों के नदी की धारा में बह जाने की जानकारी उपजिलाधिकारी सतीष वागल ने दी थी। कोस्ट गार्ड, एनडीआरएफ, नौसेना के संयुक्त प्रयास से अब तक 26 शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि 14 लोग अब भी लापता हैं।
इस बीच राज्य के राहत व पुनर्वास मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि जिन लोगों का अब तक कोई पता नहीं चला है उनके जिंदा बचने की सदिच्छा के साथ सरकार दो महीने तक इंतजार करेगी। उसके बाद यदि उनका पता नहीं चलता है तो उन्हें मृत मानकर उनके परिवार को सहायता राशि दे दी जाएगी।
पाटिल के अनुसार इस तरह के हादसे में सात साल तक इंतजार करने का नियम है लेकिन हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुआवजा देने की समय सीमा दो महीने तय की गई है।
हालांकि उपजिलाधिकारी सतीश वागल का कहना है कि बचाव दल ने तब तक राहत अभियान जारी रखने का फैसला किया है जब तक सभी शव और नदी में बही गाड़ियों का पता नहीं लगा लेते।