भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा है कि वर्तमान परिदृश्य में देश के घरेलू उद्योगों के लिए समुद्री हवाई क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में लगे घरेलू उद्योग के लोगों को स्वदेशी समाधान तलाशने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अभी उनके लिए सुनहरे मौके हैं।
रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों के लिए कैसे अवसर हैं? इस सवाल पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी का कहना है कि समुद्री हवाई क्षेत्र में क्षमता उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि घरेलू उद्योग को नौसेना के साथ मिलकर स्वदेशी समाधान विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। नौसेना प्रमुख ने आश्वस्त किया कि घरेलू उद्योग को समर्थन और औद्योगिक क्षमता के विकसित करने के लिए जरूरी माहौल बनाने के लिए नेवी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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आविष्कार, नवाचार और स्वदेशीकरण की पहल करें उद्योग
उन्होंने कहा कि समुद्री हवाई क्षेत्र का दायरा बढ़ा है। यही कारण है कि रक्षा उद्योग में अरबों अवसरों की बाढ़ आ रही है। नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने बंगलूरू में आयोजित एयरो इंडिया 2025 के दौरान कहा कि व्यापक अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए घरेलू उद्योग से जुड़ी कंपनियों को नौसेना के साथ मिलकर आविष्कार, नवाचार, स्वदेशीकरण और समाधान तलाशने की पहल करनी चाहिए। वे समाधानों को एकीकृत करने के लिए आमंत्रित भी कर रहे हैं। नौसेना प्रमुख ने कहा कि नेवी के लिए उद्योग केवल उत्पादों के बारे में नहीं है। उन्होंने साझेदारी को भी अहम बताया।
मजबूत घरेलू रक्षा उद्योग समय की मांग
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि उद्योग जगत के साथ नौसेना का जुड़ाव केवल क्षमता अधिग्रहण तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान माहौल में रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत है। निर्णायक युद्ध लड़ने में स्वदेशी होने का लाभ मिलता है। ऐसे में हमारा लक्ष्य स्वदेशी समाधान तलाशना है। उन्होंने हालिया वैश्विक संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि मजबूत घरेलू रक्षा उद्योग समय की मांग है। सरकार की स्पष्ट नीतियों और रक्षा मंत्रालय की तरफ से मिले स्पष्ट रोडमैप के कारण आज अवसरों की भरमार है।
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सरकार का लक्ष्य तीन लाख करोड़ रुपये का स्वदेशी रक्षा उत्पादन, उद्योग जगत के लिए सुनहरा मौका
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन 1.25 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। इसमें 20 फीसदी से अधिक भागीदारी निजी क्षेत्र की है। रक्षा निर्यात 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसमें भी 60 फीसदी से अधिक निजी क्षेत्र का योगदान है। अगले चार साल यानी 2029 तक सरकार का लक्ष्य तीन लाख करोड़ रुपये का स्वदेशी रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक निर्यात करना है। यही कारण है कि घरेलू रक्षा उद्योग के सामने सुनहरा अवसर है।
नौसेना प्रमुख ने घरेलू उद्योग के लिए कुछ टिप्स भी साझा किए। बिंदुवार एक नजर एडमिरल त्रिपाठी के 'मंत्र' पर-
सबसे पहले भारतीय नौसेना के हवाई क्षेत्र की विशिष्टता और समुद्र में चुनौतीपूर्ण वातावरण को समझना होगा।
घरेलू उद्योग जगत को अपनी क्षमता इसके मुताबिक ढालनी होगी।
तेजी से बदलते तकनीकी क्षेत्र को देखते हुए कंपनियों को अपनी डिजाइन और किसी भी काम को निपटाने में समय सीमा घटाने पर भी ध्यान देना होगा।