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GBS Alert: मुंबई में जीबीएस की वजह से पहली मौत, अस्पताल में ‘वार्ड बॉय’ के रूप में काम करने वाले मरीज की मौत

Wed, 12 Feb 2025 01:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, मुंबई

सार

बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आयुक्त और प्रशासक भूषण गगरानी ने पुष्टि की कि यह जीबीएस के कारण महानगर में पहली मौत है। अधिकारियों ने पहले कहा था कि मुंबई में जीबीएस का पहला मामला सात फरवरी को सामने आया था, जब अंधेरी (पूर्व) की निवासी 64 वर्षीय महिला इससे पीड़ित पाई गई थी।
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वायरस - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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मुंबई के एक अस्पताल में 53 वर्षीय व्यक्ति ने गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के कारण जान गंवा दी। यह इस तंत्रिका विकार की वजह से हुई पहली मौत है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि वडाला इलाके का निवासी और एक अस्पताल में ‘वार्ड बॉय’ के रूप में काम करने वाला मरीज लगभग 15 दिन पहले पहले पुणे गया था, जहां जीबीएस का भीषण प्रकोप है। उसे 23 जनवरी को यहां एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, कई दिन से उसकी हालत गंभीर थी और मंगलवार को उसकी मौत हो गई।

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बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आयुक्त और प्रशासक भूषण गगरानी ने पुष्टि की कि यह जीबीएस के कारण महानगर में पहली मौत है। अधिकारियों ने पहले कहा था कि मुंबई में जीबीएस का पहला मामला सात फरवरी को सामने आया था, जब अंधेरी (पूर्व) की निवासी 64 वर्षीय महिला इससे पीड़ित पाई गई थी।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें अनदेखा
डॉ विकास बताते हैं, गिलियन-बैरे सिंड्रोम खतरनाक जटिलताओं का कारण बन सकती है, अगर समय पर इसका इलाज न प्राप्त किया जाए। इसलिए बीमारी के संकेतों को लेकर गंभीरता जरूरी है। अगर आपको कुछ दिनों से इन पांच में से दो लक्षण भी महसूस हो रहे हैं तो सावधान हो जाइए और इलाज के लिए तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। 
  1. इस बीमारी में कमजोरी महसूस होती है जो पैरों से शुरू होकर छाती और सिर तक जा सकती है I
  2. हाथों, पैरों या शरीर के अन्य हिस्सों में झनझनाहट या सुन्न होने का एहसास हो सकता है।
  3. गंभीर मामलों में, सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
  4. मरीजों को मांसपेशियों की पूर्ण या आंशिक रूप से लकवा मारने की समस्या हो सकती है। 
  5. आंतों और मूत्र प्रणाली की समस्या भी इस बीमारी के शिकार लोगों में देखी जाती रही है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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