भारतीय ह्यूमन स्पेस प्रोग्राम के जरिए मात्र 16 मिनट में तीन भारतीय अंतरिक्ष में होंगे। श्रीहरिकोटा से लांच होने के बाद इनके अरब सागर में उतरने की तैयारी पिछले 14 सालों से चल रही है। इस मैन मिशन में यह सभी 5-7 दिन अंतरिक्ष में बिताएंगे। दरअसल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2022 तक अंतरिक्ष में अपना पहला मानवयुक्त यान ‘गगनयान’ भेजने की रूपरेखा तैयार कर ली है। योजना के मुताबिक, 2022 तक भारत तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अपना पहला यान भेजेगा। इस योजना पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 2004 से ही तैयार किए जा रहे गगनयान को 15 अगस्त, 2022 तक अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य के मुताबिक, पहली बार तीन अंतरिक्षयात्रियों को 5-7 दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
गगनयान को धरती की सतह से 300-400 किमी की दूरी वाले कक्षा में स्थापित किया जाएगा। फरवरी 2021 और मार्च 2022 में दो मानवरहित गगनयान भी प्रयोग के तौर पर अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से इस योजना के बारे में ऐलान किया था। तीन विशेषज्ञ लोगों के चयन के बाद उन्हें दो से तीन साल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अगर भारत अपने मिशन में कामयाब होता है तो ऐसा करने वाला वो दुनिया का मात्र चौथा देश हो जाएगा। अब तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही अंतरिक्ष में अपना मानवयुक्त यान भेजने में सफलता पाई है।
सिर्फ 16 मिनट में यान अंतरिक्ष में पहुंच जाएगा। यह सात दिन तक पृथ्वी की सतह से 300-400 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाएगा। कुल तीन यात्री होंगे, जो माइक्रो ग्रेविटी एक्सपेरिमेंट करेंगे। यह जानकारी इसरो प्रमुख के. सिवन ने मंगलवार को दी। उन्होंने बताया कि मिशन पर 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे, जो दुनिया के किसी भी मानव मिशन से कम है। 14 साल से चल रही इस तैयारी में 4 साल और लगेंगे, फरवरी 2022 में 3 यात्री 16 मात्र मिनट में अंतरिक्ष पहुंचेंगे और 7 दिन बाद लौट आएंगे।
के. सिवन के मुताबिक ऑर्बिटल मॉड्यूल के दो हिस्से होंगे। एक-क्रू मॉड्यूल, दूसरा-सर्विस मॉड्यूल। क्रू मॉड्यूल 3.7 मीटर व्यास में एक सर्कुलर क्यूबिकल जैसा होगा, जिसकी ऊंचाई 7 मीटर और वजन 7 टन होगा। इसी मॉड्यूल में तीनों अंतरिक्ष यात्री रहेंगे। सर्विस मॉड्यूल में तापमान और दबाव को बनाए रखने वाले उपकरण, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, ऑक्सीजन और खाने-पीने का सामान होगा।
अरब सागर में पैराशूट से होगी वापसी
लौटते समय स्पेसक्राफ्ट की गति को धीरे-धीरे कम किया जाएगा और पृथ्वी से 120 किलोमीटर की दूरी पर क्रू मॉड्यूल सर्विस मॉड्यूल से अलग हो जाएगा। क्रू मॉड्यूल से यात्री पैराशूट के जरिए गुजरात के पास अरब सागर में उतरेंगे। यदि कोई परेशानी हुई तो बंगाल की खाड़ी में उतरने का विकल्प होगा। इसके अलावा क्रू मॉड्यूल को सीधे रिसीव करने की भी सुविधा होगी। स्पेसक्राफ्ट की तकनीक, लांचिंग वगैरह पहले जैसी ही है। एक बात जो सबसे नई है, वह है इसमें इंसानों की मौजूदगी।
पहली बार होगा कि टेस्ट में जानवर नहीं भेजे जाएंगे
ऐसा करने वाला भारत पहला देश होगा कि यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले किसी जानवर पर इसका टेस्ट नहीं होगा। यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले दो टेस्ट फ्लाइट होंगी। के. सिवन ने कहा कि गगनयान मिशन के तहत अगले तीन साल में 15 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा, जिनमें से करीब 900 लोगों को सीधे इसरो में नौकरी मिलेगी।
मिशन की चीफ 56 वर्षीय डॉ. ललितांबिका
मिशन की जिम्मेदारी 56 साल की वैज्ञानिक डॉ. वीआर ललितांबिका को सौंपी गई है। यात्रियों का चयन इसरो और एयरफोर्स मिलकर करेंगे। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि इसमें कितने महिला या पुरुष होंगे और किस क्षेत्र विशेष के होंगे। लेकिन, पहले किसी पायलट को प्राथमिकता दी जा सकती है। चुने गए यात्रियों को करीब तीन साल की ट्रेनिंग मिलेगी, जिसमें जीरो ग्रेविटी ट्रेनिंग भी शामिल होगी।
बीते दो साल में संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार ने कई बार कहा कि अंतरिक्ष में इंसान भेजने की योजना नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गगनयान मिशन का ऐलान किया तो इसरो ने अपनी तैयारियों का खुलासा किया।
देश के पहले अंतरिक्ष यात्री थे राकेश शर्मा
राकेश शर्मा 2 अप्रैल 1984 को अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले भारत के पहले और दुनिया के 138वें अंतरिक्ष यात्री बने थे। वे 7 दिन 21 घंटे 40 मिनट अंतरिक्ष में रहे थे। वे अमेरिकी स्पेस मिशन के तहत गए थे।