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भारतीय अर्थव्यवस्था एशिया में सबसे तेज, बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने से बढ़ा निवेश 

Fri, 20 Jul 2018 06:07 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नए व्यापारिक तनावों के बावजूद दक्षिण एशिया भारत के नेतृत्व में एशिया और प्रशांत क्षेत्र में सबसे तेज गति से विकास करने वाला आर्थिक क्षेत्र बना रहेगा। यह बात एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बृहस्पतिवार को जारी एक नई रिपोर्ट में कही। एशियाई विकास परिदृश्य (एडीओ) के एक पूरक दस्तावेज में कहा गया है कि एशिया और प्रशांत क्षेत्र की विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 2018 और 2019 में विकास की गति तेजी बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच बढ़ते तनावों के बावजूद समूचे क्षेत्र में विकास की तेज रफ्तार बरकरार रहेगी।

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ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बीच दक्षिण एशिया सबसे तेजी से विकास करने वाला उप क्षेत्र बना रहेगा और इस क्षेत्र का नेतृत्व भारत करेगा। भारत की अर्थव्यवस्था कारोबारी साल 2018 के लिए अनुमानित विकास दर 7.3 फीसदी और उसके बाद 2019 में और बढ़कर 7.6 फीसदी को हासिल करने की दिशा में अग्रसर है, क्योंकि बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने और कर सुधार के लिए उठाए गए कदमों के कारण निवेश बढ़ा है।

अप्रैल में प्रकाशित एशियाई विकास परिदृश्य में कहा गया था कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और बैंकिंग सुधारों के बल पर भारत की आर्थिक विकास दर मौजूदा कारोबारी साल में बढ़कर 7.3 फीसदी पर और अगले कारोबारी साल में और बढ़कर 7.6 फीसदी पर पहुंच जाएगी। इसके साथ ही भारत का सबसे तेज एशियाई अर्थव्यवस्था का ताज बरकरार रहेगा।
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व्यापारिक तनाव का अब तक दक्षिण एशिया पर अधिक असर नहीं
एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवाडा ने कहा कि यद्यपि बढ़ता व्यापारिक तनाव इस क्षेत्र के लिए एक चिंता बना हुआ है, फिर भी 2018 में अब तक उठाए गए संरक्षणवादी व्यापारिक कदमों ने विकासशील एशिया की ओर और उसकी ओर से होने वाले तेज व्यापार प्रवाह को बहुत अधिक प्रभावित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि समझदारीपूर्ण आर्थिक और वित्तीय नीति निर्माण से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को बाहरी झटकों से निपटने के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी। एजेंसी

चुनौती के बावजूद विकास जारी : फिक्की
नई दिल्ली। भारत का विकास पहले की तरह जारी रहेगा, क्योंकि मौजूदा कारोबारी साल में जीडीपी की विकास दर करीब 7.5 फीसदी और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने का अनुमान है। यह बात उद्योग संघ फिक्की ने बृहस्पतिवार को कही। फिक्की ने मई में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार के घटकर 3.2 फीसदी पर आने और जून में खुदरा महंगाई के बढ़कर पांच फीसदी पर पहुंचने को लघु अवधि की चुनौती बताया।

संघ ने कहा कि सरकार और आरबीआई इनके साथ तत्परता से निपट रहे हैं और इन संकेतकों को अर्थव्यवस्था में तेजी के संकेतों को कोई खास नुकसान पहुंचाने वाले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। फिक्की के प्रेसिडेंट रशेष शाह ने एक बयान में कहा कि औद्योगिक उत्पादन विकास दर के अगले कुछ महीने में जहां वापस तेज हो जाने की संभावना है, वहीं आरबीआई महंगाई में बढ़ोतरी पर गंभीरता से ध्यान दे रहा है। रिजर्व बैंक और सरकार निश्चित रूप से इसे उपयुक्त स्तर पर बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि इसमें जीएसटी उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा। जीएसटी वसूली के रुझान जहां अर्थव्यवस्था में सकारात्मक माहौल की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करते हैं, वहीं जीएसटी की संरचना आने वाले समय में महंगाई को भी कम करेगी। एजेंसी

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