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Anti-Drone System: ड्रोन खतरे से निपटने को बड़ी तैयारी, सेना और नौसेना को मिलेगा स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम

Thu, 15 Jan 2026 07:00 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को बड़ा बढ़ावा मिला है। सेना और नौसेना ने एक भारतीय कंपनी से अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम के ऑर्डर दिए हैं, जिससे सीमाओं और रणनीतिक ठिकानों पर बढ़ते ड्रोन खतरों से निपटने की भारत की क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।

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अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। नोएडा स्थित एक रक्षा फर्म ने गुरुवार को घोषणा की है कि उसे भारतीय सेना और भारतीय नौसेना से अपने स्वदेशी रूप से विकसित एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए ऑर्डर मिले हैं। इसका मकसद दुश्मन ड्रोन को रोकने और खत्म करने और उभरते हवाई खतरों का मुकाबला करने की उनकी क्षमताओं को मजबूत करना है।

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कंपनी ने क्या कहा?
नोएडा की कंपनी 'आईजी डिफेंस' ने बताया कि उनके इस सिस्टम का नाम 'आईजी टी-शूल पल्स' (IG T-Shul Pulse) है। यह काफी हल्का है और इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। यह सिस्टम दो किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के ड्रोन को जाम कर सकता है। इससे सैनिकों को हवाई खतरों से निपटने का तुरंत मौका मिल जाता है।

एक महीने में होगी डिलीवरी
कंपनी के मुताबिक, यह एक हाथ में पकड़ने वाला (हैंडहेल्ड) डिवाइस है। इसका इस्तेमाल सीमा पर तैनात जवान, सैन्य ठिकानों और जरूरी जगहों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा। उम्मीद है कि अगले एक महीने में ये सिस्टम सेना और नौसेना को मिल जाएंगे।
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सिर्फ दुश्मन पर करेगा वार
यह सिस्टम पुराने जैमर से काफी अलग और आधुनिक है। इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ दुश्मन के ड्रोन की दिशा में काम करता है। इससे सेना के अपने संचार उपकरणों या नौसेना के सिस्टम पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। यह जमीन और समुद्र दोनों जगह मुश्किल हालात में भी भरोसेमंद है।
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'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा
यह पूरा सिस्टम भारत में ही डिजाइन और तैयार किया गया है। यह 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे सीमा पार से आने वाले ड्रोन और जासूसी के खतरों से निपटने में भारत की तैयारी और मजबूत होगी। कंपनी का कहना है कि वे जरूरत पड़ने पर इसका उत्पादन और बढ़ा सकते हैं।

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