इस साल भारत की थलसेना गणतंत्र दिवस परेड में स्वदेशी का संदेश देती नजर आएगी। दरअसल, सेना की तरफ से एलान किया गया है कि इस बार परेड में लाए जाने वाले सभी उपकरण 'मेड इन इंडिया' होंगे। यहां तक कि 21 बंदूकों की सलामी भी भारत में बनी 105 एमएम की इंडियन फील्ड गन्स से दी जाएगी। इतना ही नहीं सैन्य हथियारों में इस्तेमाल होने वाले गोला-बारूद भी भारत में ही बने हैं।
इस साल गणतंत्र दिवस पर 25पाउंडर बंदूकों वाली पुरानी तोपों के बजाय नए 105 एमएम इंडिन फिल्ड गन से राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। यह फैसला सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया है। दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल भावनीश कुमार ने बताया कि हम स्वदेशीकरण की ओर जा रहे हैं और वह समय दूर नहीं जब सभी उपकरण स्वदेशी होंगे।
दरअसल, 2281 फिल्ड रेजीमेंट की 1940 के शुरुआत में निर्मित सात तोपों से राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में सलामी देने के लिए गोले दागे जाते थे। इनका निर्माण ब्रिटेन में हुआ था और इन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि 1972 में 105 इंडियन फिल्ड गन को डिजाइन किया गया था और गन कैरेज फैक्टरी जबलपुर और फिल्ड गन फैक्टरी कानपुर में इनका निर्माण होता है और वर्ष 1984 से ही ये सेवा में है।
मिसाइल टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी महिला अधिकारी
भारतीय सेना की महिला अधिकारी इस साल गणतंत्र दिवस परेड में मिसाइल टुकड़ी का नेतृत्व करने के साथ-साथ डेयरडेविल्स के रूप में मोटरसाइकिलों पर सवार होंगी। सिग्नल कोर की लेफ्टिनेंट डिंपल भाटी भारतीय सेना की डेयरडेविल्स मोटरसाइकिल टीम का हिस्सा होंगी। महिला अधिकारी पिछले एक साल से दल के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं।
जोधपुर की रहने वाली भाटी ने कहा कि वह पिछले एक साल से जबलपुर केंद्र से अपनी टीम के साथ विभिन्न शो और कार्यक्रमों में भाग ले रही हैं। एक अन्य महिला अधिकारी, लेफ्टिनेंट चेतना शर्मा, इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में 'मेड इन इंडिया' आकाश, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने कहा कि वह हर साल टीवी पर परेड देखकर उसमें हिस्सा लेना चाहती थीं और इस साल उनका सपना पूरा हो रहा है।