नौसेना ने पिछले महीने युद्ध तैयारियों को परखने के लिए एक बड़ा अभ्यास किया। अभ्यास के दौरान परमाणु ताकत से लैस पनडुब्बियों, आईएनएस विक्रमादित्य के साथ वायुसेना के एसयू-30 और जगुआर लड़ाकू विमानों ने भी हिस्सा लिया। थियेटर लेवल रेडिनेस एंड ऑपरेशनल एक्सरसाइज यानी ट्रोपेक्स-2017 के तहत इस कवायद में नौसेना, वायुसेना, थल सेना और तटरक्षक बल के मिलेजुले बेड़े की युद्ध तैयारियों की जायजा लिया गया।
अरब सागर और हिंद सागर के उत्तर मध्य के बड़े दायरे में हुए इस अभ्यास का मकसद सेना की युद्ध और किसी भी चुनौती से जूझने की उसकी तैयारियों का जायजा लेना है। सुरक्षा के मौजूदा माहौल में ट्रॉपेक्स 2017 की खासी अहमियत है। यह कवायद भारतीय नौसेना, थलसेना, वायुसेना और तटरक्षक बलों की युद्ध क्षमता और जटिल हालात में एक दूसरे के साथ मिल कर युद्ध ऑपरेशन को मजबूती देने के उद्देश्य से की गई थी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 24 जनवरी से 23 फरवरी तक चले इस अभ्यास में नौसेना के पश्चिमी और पूर्वी कमान के 45 जलपोतों, पांच पनडुब्बियों, तटरक्षक बल के 11 जहाज, सेना की टुकड़ियों और वायुसेना के 20 विमानो ने हिस्सा लिया। इसमें एसयू-30 और जगुआर विमान भी शामिल थे। इसमें वायुसेना, थलसेना और नौसेना ने एक दूसरे से मिल कर युद्ध क्षमताओं का परिचय दिया और किसी भी चुनौती से निपटने के कौशल का प्रदर्शन किया। नौसेना और वायुसेना की विभिन्न पोतों, पनडुब्बियों और वायुसेना की फायरिंग क्षमता की भी जांच की गई।