भारतीय सेना में 'जुगाड़' बहुत प्रसिद्ध हैं। चाहे 1971 की भारत-पाकिस्तान या करगिल युद्ध की बात करें, तो भारतीय सेना ने अपने कई 'जुगाड़ों' से दुश्मन को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। यह 'जुगाड़' की परंपरा आज तक जारी है। वहीं स्मार्ट वर्क के मामले में जुगाड़' बहुत काम आता है। आपने ट्रैक्टर पर एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) कभी लगी देखी है। यह सुन कर आपको आश्चर्य जरूर होगा कि यह कैसे संभव है। एक खेत जोतने के काम आने वाले वाहन का एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल से क्या संबंध है। असल में यह भारतीय सेना का एक 'जुगाड़' या यूं कहें कि एक इनोवेशन है। भारतीय सेना ने इस जुगाड़ का नाम दिया है इंप्रोवाइज्ड ट्रैक्टर माउंटेड एटीजीएम।
वेस्टर्न कमांड ने साझा की फोटो
हाल ही में भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड ने कुछ फोटोग्राफ्स अपने एक्स सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर कीं। उनमें से एक फोटो ने अचानक ही ध्यान खींच लिया। वह फोटो थी ट्रैक्टर पर लगीं एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल्स की। फोटोग्राफ्स की डिटेल थी, जीओसी खड़गा कोर ने जेसोर ब्रिगेड का दौरा किया और जेसोर वॉरियर्स की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की और ब्रिगेड को उनके प्रोफेशनलिज्म के लिए बधाई दी और उन्हें उत्कृष्टता का प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया। जेसोर ब्रिगेड इन दिनों पंजाब में तैनात है। वहां कुछ दिन पहले जीओसी खड़गा कोर लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह जवानों को प्रोत्साहित करने के लिए जेसोर ब्रिगेड पहुंचे थे, तो वहां ब्रिगेड ने अपने कुछ खास इनोवेशंस की जानकारी जीओसी को दीं।
40 मीटर से चार किमी रेंज तक टैंक बन सकते हैं निशाना
भारतीय सेना के सूत्र बताते हैं कि भारतीय सेना में ऐसे इनोवेशंस बेहद आम हैं, जो उस समय के हालात और जमीनी स्थिति को देखते हुए बनाए जाते हैं। आम बोलचाल में इन्हें 'जुगाड़' कहा जाता है। वह बताते हैं कि ये जुगाड़ पंजाब और राजस्थान सीमा पर ये 'जुगाड़' बेहद काम के हैं। ट्रैक्टर पर लगा एटीजीएम लॉन्चर इन इलाकों की समस्या के लिए एक बेहतरीन भारतीय 'जुगाड़' है। इससे पहले भी भारतीय सेना ने ट्रैक्टर माउंटेड एटीजीएम बनाया था। लेकिन उसमें कुछ खामियां थीं, जो इस बार संभवतया दूर कर ली गई हैं। वह बताते हैं कि ट्रैक्टर 9M113 कोंकुर्स ATGM लॉन्चर और अतिरिक्त मिसाइलों से लैस है। यह लॉन्चर 40 मीटर से चार किमी तक की दूरी पर खड़े टैंक को नष्ट कर सकता है।
रेतीले इलाकों में एटीवी का विकल्प हैं ट्रैक्टर
वहीं ट्रैक्टर पर एटीजीएम लॉन्चर लगाने की वजह बताते हुए सैन्य सूत्र कहते हैं कि राजस्थान और पंजाब का अधिकांश इलाका पाकिस्तान से सटा है। जहां राजस्थान से सटी सीमा वाला ज्यादातर इलाका पूरा रेतीला है, तो वहीं पश्चिमी पंजाब में खेत पाक सीमा से सटे हुए हैं। राजस्थान में थार जैसे रेतीले इलाके में सेना की गाड़ियां चलाने में काफी दिक्कत आती है। उनके रेत में फंसने का खतरा रहता है। ऐसे इलाकों में एटीवी यानी ऑल टैरेन व्हीकल्स ज्यादा कामयाब हैं। लेकिन वे महंगी होती हैं। वहीं ट्रैक्टर पर एटीजीएम लॉन्चर लगाने से ज्यादा स्पष्ट विजन मिलता है और सामने टैंक को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा ट्रैक्टर के पिछले पहिए बड़े होते हैं, जिससे उसके रेत में फंसने के चांस बेहद कम होते हैं। वह कहते हैं कि वेस्टर्न कमांड ने जो फोटो शेयर की है, उसमें ट्रैक्टर को कैमोफ्लॉज से ढका दिखाया है। इस पर वे कहते हैं कि इससे ट्रैक्टर (हीट सिग्नेचर) कम गर्मी छोड़ता है। वहीं ट्रैक्टर की वजन ढोने की क्षमता काफी होती है और आसानी से चार लोगों को ले जा सकता है। इसके अलावा खास बात यह है कि यह आसानी से रिपेयर हो सकता है और इसके लिए खास तेल वगैरहा की जरूरत नहीं पड़ती है।
पंजाब में खेतों से टैकों को निशाना बनाने में आसानी
सैन्य सूत्र कहते हैं कि युद्ध के दौरान कई बार सेना के बड़े वाहन फंस जाते हैं, निकलने की जगह बेहद तंग होती है। वहीं ट्रैक्टर ऑफ रोडिंग भी आसानी से कर सकता है। नहीं तो ऑफ रोडिंग के लिए खास व्हीकल्स की जरूरत पड़ती है, ट्रैक्टर के साथ ये समस्या नहीं है। सूत्र बताते हैं कि पंजाब में जहां खेत फसलों से लहरा रहे होते हैं, तो वहीं से एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल के लिए एक ऊंचा प्लेटफॉर्म चाहिए होता है। ट्रैक्टर पर बैठ कर एटीजीएम से आसानी से टैंक को निशाना बनाया जा सकता है। खेत में बड़े सैन्य वाहन तो उतारे नहीं जा सकते। ऐसे में या तो पैदल अटैक करना पड़ेगा या फिर ट्रैक्टर आसान विकल्प है।
लागत तकरीबन 6000 रुपये के आसपास
सूत्र बताते हैं कि इसकी मॉडिफिकेशन कॉस्ट भी बहुत ज्यादा पड़ती और बहुत कुछ करना भी नहीं पड़ता है। इसकी लागत भी तकरीबन 6000 रुपये के आसपास ही पड़ती है। इससे पहले भी सेना की साउथ वेस्टर्न कमांड ने मई 2023 में रेगिस्तानी इलाके का एक फोटो शेयर किया था, जिसमें जॉन डीरे कंपनी के ट्रैक्टर पर एटीजीएम लॉन्चर लगे हुए थे। वहीं पास में एक रॉयल एनफील्ड बुलेट भी खड़ी थी, जिसमें एटीजीएम लॉन्चर लदे हुए थे।