भारतीय सेना साल 2026 से प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती की तैयारी कर रही है। 150 से 500 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली ये मिसाइलें चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात की जाएंगी। इन मिसाइलों को खास भारत की उत्तरी सीमाओं पर चीन से मिल रहे खतरों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं भारत इन मिसाइलों को अर्मेनिया को भी निर्यात कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक आर्मेनिया ने इन मिसाइलों की खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई है, जिस पर बातचीत जारी है।
सतह से सतह पर मार कर सकती है प्रलय मिसाइल
प्रलय मिसाइल कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल यानी शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है। यह मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती है, जिसे दुश्मन की इंटरसेप्टर मिसाइलों से बचने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ डेवलप किया गया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायु सेना ने 120 प्रलय मिसाइलों के लिए भी ऑर्डर दिए हैं, जिनकी डिलीवरी 2025 के अंत में शुरू होने की उम्मीद है। इन मिसाइलों का ऑर्डर 2022 में दिया गया था। इसके बाद वायुसेना को अप्रैल 2023 में और दो यूनिट यानी 250 मिसाइलों का अप्रूवल मिला। वहीं सितंबर 2023 में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इस मिसाइलों के लिए एक आर्मी रेजिमेंट बनाने की अनुमति दी। जिसके बाद एक यूनिट में 120 मिसाइलें होंगी। कुल मिलाकर 370 मिसाइलें सेना में शामिल की जाएंगी। इन्हें भारतीय सेना की रॉकेट फोर्स बनने के बाद इसमें शामिल कर लिया जाएगा।
कई देशों ने प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों में दिखाई दिलचस्पी
सूत्रों ने बताया कि प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों को कई देशों दिलचस्पी दिखाई है। आर्मेनिया इन मिसाइलों को खरीदने का इच्छुक है औऱ इस पर बातचीत जारी है। दरअसल आर्मेनिया इन मिसाइलों के जरिए अजरबैजान की लोरा (लॉन्ग रेंज आर्टिलरी) बैलिस्टिक मिसाइलों से मुकाबला करना चाहता है, जिन्हें इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने बनाया है। लोरा एक थियेटर क्वॉसी बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 400 किलोमीटर है और जीपीएस के साथ इसकी सर्कुलर एरर प्रोबेबिलिटी (सीईपी) 10 मीटर है। वहीं सूत्रों ने बताया कि जल्द ही आर्मेनिया को प्रलय मिसाइलों की सप्लाई की जा सकती है। हालांकि बातचीत में जो कानूनी और तकनीकी पेंच सामने आ रहा है, उसमें भारत ने 300 किलोमीटर से अधिक की रेंज वाली मिसाइलों और 500 किलोग्राम से अधिक वजन वाले वॉरहेड का निर्यात नहीं करने की प्रतिबद्धता जताई है, जो अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण समझौतों के तहत आता है। जिसके चलते हो सकता है कि अर्मेनिया को सप्लाई की जाने वाली मिसाइलें कम रेंज और कम वॉरहेड वजन वाली हों।
प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल की खासियत
वहीं, प्रलय की मारक क्षमता 150-500 किलोमीटर है। प्रलय की रफ्तार 1200 किमी प्रति घंटा है, जिसे बढ़ाकर 2000 किमी प्रति घंटा किया जा सकता है। इसे डीआरडीओ के बीएमडी सिस्टम की पृथ्वी एडी मिसाइल से डेवलप किया गया है। प्रलय में टर्मिनल गाइडेंस के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर लगा है। वहीं यह मिसाइल में स्वदेश में विकसित फ्यूज्ड सिलिका रडार डोम से लैस है। सूत्रों ने बताया कि प्रलय रूस की इस्कैंडर-एम मिसाइल का एक एनालॉग है, जो यूक्रेन में काफी कारगर साबित हुई है। वहीं प्रलय और इस्कैंडर की सटीकता लगभग 10 मीटर सीईपी के बराबर है। वहीं, प्रलय मिसाइल इस्केंडर-एम की तरह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा भी दे सकती है। वहीं, क्वॉसी या अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइलों को बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में रोकना अधिक मुश्किल होता है। वर्तमान में भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना की मिसाइल यूनिट में तैनात पृथ्वी टैक्टिकल मिसाइल में यह फीचर है। सूत्रों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान दोनों के पास इस तरह की मिसाइलें हैं। जहां चीन के पास डोंगफेंग-12 मिसाइल है, तो पाकिस्तान के पास चीन से मिली गजनवी एम-11 और शाहीन मिसाइल है।
दिसंबर 2021 में 24 घंटे के भीतर भारत ने इस मिसाइल का दो बार परीक्षण किया गया था। वहीं नवंबर 2023 में ओडिशा तट पर अब्दुल कलाम द्वीप से भी प्रलय का परीक्षण किया था। यह मिसाइल अपने परीक्षण में पूरी तरह से कामयाब रही थी। वहीं, चीन और पाकिस्तान सीमा पर इस मिसाइल की तैनाती से भारत की सामरिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।