रूस में गुरुवार से शुरू हुए वोस्तोक 2022 सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना के गोरखा राइफल्स के सैनिकों की एक टुकड़ी ने भाग लिया। ये सैन्य अभ्यास एक सितंबर से सात सितंबर तक सुदूर पूर्व और जापान सागर में विभिन्न स्थानों पर चलेगा। चीन, बेलारूस, ताजिकिस्तान और मंगोलिया आदि देशों के 50,000 से अधिक सैनिक शामिल हुए हैं। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इसके बारे में जानकारी दी। इसके मुताबिक, अभ्यास का उद्देश्य अन्य भाग लेने वाले सैन्य टुकड़ियों और पर्यवेक्षकों के बीच बातचीत और समन्वय करना है।
भारतीय सेना की टुकड़ी हुई शामिल
सेना ने अपने बयान में बताया कि 7/8 गोरखा राइफल्स के सैनिकों की एक भारतीय सेना की टुकड़ी अभ्यास स्थान पर पहुंची थी। अगले सात दिनों में ये सैनिक संयुक्त क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास, युद्ध चर्चा और गोलाबारी अभ्यास करने के लिए संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारतीय सेना की टुकड़ी व्यावहारिक पहलुओं को साझा करने और मान्य अभ्यासों, प्रक्रियाओं और नई तकनीक के अभ्यास को चर्चा और सामरिक अभ्यासों के माध्यम से सीखने के लिए तत्पर है।
सीखने को मिलेंगे रक्षात्मक और आक्रामक अभियानों के गुर
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास ने रूस के रक्षा मंत्रालय के हवाले से एक बयान में कहा है कि एक से सात सितंबर तक ईस्टर्न मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के सात प्रशिक्षण मैदानों पर और ओखोतस्क सागर एवं जापान सागर के समुद्री और तटीय क्षेत्रों में ‘रक्षात्मक और आक्रामक अभियानों का अभ्यास’ किया जाएगा। यह अभ्यास हिस्सा लेने वाले देशों की सेनाओं को ‘रक्षात्मक और आक्रामक अभियानों के गुर’ सीखने का अवसर प्रदान करेगा। यह अभ्यास सात अलग-अलग स्थानों पर किए जाएंगे।
रिपोर्ट में कहा गया, यह सामरिक गतिविधि 50 हजार सैनिकों, युद्ध से जुड़े पांच हजार साजो समान व सैन्य उपकरण, 140 विमान, 60 युद्धपोत तथा अन्य जहाजों के साथ होगी। इस सैन्य अभ्यास में चीन, भारत, लाओस, मंगोलिया, निकारागुआ, सीरिया और पूर्व सोवियत देश हिस्सा ले रहे हैं।
सैन्य अभ्यास से अमेरिका चिंतित
वहीं, रूस ने जब से भारत के साथ सैन्य अभ्यास ‘वोस्तोक 2022’ की घोषणा की है, अमेरिका बिलबिलाया हुआ है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस युद्धाभ्यास में भारत और चीन के साथ कई अन्य देशों के 50 हजार सैनिक भाग ले रहे हैं। अब इस युद्धाभ्यास को लेकर व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया सामने आई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जीन पियरे कहा है कि यूक्रेन के साथ अकारण एवं बर्बर युद्ध छेड़ने वाले रूस के साथ किसी भी अन्य देश का सैन्य अभ्यास करना उसके लिए चिंताजनक है।
जब उनसे पूछा गया कि इस मसले पर भारत पर दबाव क्यों नहीं डाला गया? तो उन्होंने कहा, सैन्य अभ्यास में भाग लेने वाले प्रत्येक देश को खुद निर्णय लेना है और मैं यह फैसला उन पर छोड़ती हूं। वहीं इस सैन्य अभ्यास में भाग लेने वाले देशों पर कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा, मेरे पास इस बारे में बताने लायक कुछ नहीं है।