भारतीय सेना ने अपनी युद्ध क्षमता को और आधुनिक व प्रभावी बनाने की दिशा में 'भैरव बटालियन' के नाम से एक जांबाज और हाई-टेक यूनिट को शामिल किया है। इसकी ताकत, तकनीक और तेजी इसे बेहद खास बनाती है।
भारतीय सेना अपनी ताकत को और आधुनिक बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में सेना ने 'भैरव बटालियन' नाम से एक और घातक यूनिट तैयार की है। यह बटालियन इस साल 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार हिस्सा लेगी और कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी। इससे पहले 15 जनवरी को जयपुर में हुए सेना दिवस समारोह में भी इस टुकड़ी ने अपनी झलक दिखाई।
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क्या है भैरव बटालियन?
भैरव बटालियन सेना की एक छोटी लेकिन हाई-टेक इकाई है। इस बटालियन में करीब 250 सैनिक हैं। खास बात यह है कि इसके जवान सिर्फ पैदल सेना (इन्फैंट्री) से नहीं, बल्कि तोपखाना, एयर डिफेंस और सिग्नल जैसी अलग-अलग इकाइयों से चुने जाते हैं। इसका मकसद हर तरह की चुनौती से निपटने के लिए एक सक्षम टीम बनाना है। अब तक ऐसी करीब 15 बटालियन तैयार हो चुकी हैं और सेना की योजना कुल 25 बटालियन बनाने की है।
'फाइट टुनाइट' का फॉर्मूला
सेना ने इस यूनिट को 'फाइट टुनाइट' यानी 'आज रात ही युद्ध' की तर्ज पर तैयार किया है। इसका मतलब है कि ये जवान किसी लंबी योजना का इंतजार नहीं करते। ये चौबीसों घंटे दुश्मन पर हमला करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहते हैं। यह बटालियन सेना की स्पेशल फोर्सेज और रेगुलर इन्फैंट्री (सामान्य सेना) के बीच एक पुल का काम करेगी। इससे स्पेशल फोर्सेज को बड़े और ज्यादा अहम मिशन के लिए फ्री रखा जा सकेगा।
दुश्मन के लिए काल
इस बटालियन का नाम भगवान शिव के रौद्र रूप 'भैरव' पर रखा गया है। इसका आदर्श वाक्य 'अभयम् भैरव' है, जिसका मतलब है 'निर्भीक रक्षक'। बटालियन का प्रतीक चिह्न 'कोबरा' है। जैसे कोबरा का वार खाली नहीं जाता, वैसे ही यह यूनिट दुश्मन के लिए काल साबित होगी।
तैनाती और जिम्मेदारी
भैरव बटालियन को राजस्थान, जम्मू, लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जा रहा है। ये जवान दुश्मन के इलाके में भीतर तक घुसकर हमला करने, ड्रोन का इस्तेमाल करने और आधुनिक तकनीक के साथ लड़ने में माहिर हैं। आधुनिक युद्ध के बदलते तरीकों और हाइब्रिड वॉरफेयर को देखते हुए यह बटालियन भारत की सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन गई है।