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Drone: PAK की नई ड्रोन साजिश, भारतीय सीमा में एक साथ दर्जनों ड्रोन छोड़ने के लिए चीन से मांगा 'ड्रोन मदरशिप'

सार

भारतीय सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों के बीच पाकिस्तान अब चीन से 'ड्रोन मदरशिप' तकनीक हासिल करने की योजना बना रहा है। पिछले साल ड्रोन घुसपैठ की 791 घटनाओं और सेना द्वारा मार गिराए गए 237 ड्रोनों के डेटा के साथ, भारत अब अपनी खुद की मिसाइल और ड्रोन फोर्स तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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ड्रोन से हमले की ताक में है पाकिस्तान, भारत सतर्क - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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'हथियार व ड्रग्स' लेकर भारतीय सीमा में आने वाले पाकिस्तानी ड्रोन का सिलसिला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। आने वाले समय में यह चुनौती बढ़ सकती है। वजह, पाकिस्तान ने नई ड्रोन साजिश रची है। भारतीय सीमा में दर्जनों ड्रोन, एक साथ छोड़ने के लिए पाकिस्तान द्वारा चीन से 'ड्रोन मदरशिप' तकनीक मांगी जा रही है। मौजूदा समय में पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन 'सिंगल' होते हैं। सुरक्षा बलों के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले पाकिस्तान ने चीन से '3600' ड्रोन एक साथ छोड़ने की तकनीक मांगी थी। यह सौदा नहीं हो सका। इसके बाद पाकिस्तान ने चीन से दर्जनों ड्रोन, सिंगल ड्राइव में छोड़ने की तकनीक मांगी है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 'ड्रोन' घुसपैठ की 791 घटनाएं दर्ज की गईं

बता दें कि गत वर्ष जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 'ड्रोन' घुसपैठ की 791 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें से नौ घटनाएं जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर और 782 घटनाएं, पंजाब तथा राजस्थान के बॉर्डर पर हुई हैं। भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में 237 ड्रोन मार गिराए थे। इनमें से विस्फोटक युक्त पांच ड्रोन, मादक पदार्थ लाने वाले 72 ड्रोन और 161 खाली ड्रोन शामिल हैं। बीएसएफ ने पंजाब से लगते अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर लगभग 280 ड्रोन जब्त किए थे। इस साल 11 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पुंछ में पांच ड्रोन देखे गए हैं। 13 जनवरी को थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, भारत अब एक मजबूत रॉकेट और मिसाइल फोर्स बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चीन और पाकिस्तान ने पहले से ही अपनी मिसाइल और ड्रोन फोर्स खड़ी कर ली है। इन हालात में अब भारत को भी ऐसी ही एक मजबूत 'ड्रोन' फोर्स की आवश्यकता है। 

पाकिस्तान की ओर से पंजाब में लगातार ड्रोन आ रहे

पाकिस्तान की तरफ से पंजाब में अब लगातार ड्रोन आ रहे हैं। जेएंडके और राजस्थान बॉर्डर पर ड्रोन देखे गए हैं। कई बार तो एक ही दिन में कई ड्रोन छोड़े जा रहे हैं। बीएसएफ द्वारा मार गिराए गए अधिकांश ड्रोन, क्वाडकोप्टर (मॉडल डीजेआई मेविक 3 क्लासिक, मेड इन चाइना) और क्वाडकोप्टर (मॉडल डीजेआई मेट्रिस 300 आरटीके, मेड इन चाइना) सीरिज के होते हैं। पाकिस्तान को अभी तक चीन से '3600' ड्रोन को एक साथ कंट्रोल करने का फार्मूला नहीं मिल सका है। हालांकि अब इस सौदे की संभावना धूमिल हो गई है।

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सूत्रों के मुताबिक, अब पाकिस्तान दर्जन भर ड्रोन को लांच करने व नियंत्रित करने का फार्मूला चीन से मांग रहा है। चीन ने ड्रोन कैरियर 'जेआईयू' 'टीआईएएन' जैसा सिस्टम तैयार किया है। इसे 'ड्रोन मदरशिप' का नाम दिया गया है। इस सिस्टम की मदद से अत्याधुनिक ड्रोन विमान एक साथ सौ छोटे ड्रोन छोड़ने में सक्षम है। इसके जरिए शत्रु राष्ट्र का एयर डिफेंस सिस्टम तबाह किया जा सकता है। जेट-पावर्ड ड्रोन कैरियर, 6 टन विस्फोटक सामग्री ले जा सकता है। इसके साथ ही दर्जनों छोटे ड्रोन भी इसमें लोड हो सकते हैं। पिछले साल चीन ने दिखा दिया है कि वह एक साथ 16000 ड्रोन को कंट्रोल कर सकता है। सैन्य कार्रवाई के लिए 'ड्रोन मदरशिप' के जरिए 100 ड्रोनों को एक साथ लॉन्च किया जा सकता है। पाकिस्तान, इसी तकनीक को हासिल करने का प्रयास कर रहा है। 

पाकिस्तान से आने वाले ज्यादातर ड्रोन असेंबल

अभी तक पाकिस्तान से भारतीय सीमा में जितने ड्रोन आ रहे हैं, वे ज्यादातर असेंबल किए जाते हैं। पाकिस्तान को चीन से सस्ती दरों पर ड्रोन के पुर्जे मिल जाते हैं। उन्हें जोड़ कर ड्रोन तैयार किया जाता है। चीन से मिले पुर्जों के जरिए डेढ़ से दो लाख रुपये में एक ड्रोन तैयार हो जाता है। पंजाब सेक्टर में बीएसएफ द्वारा मार गिराए गए अनेक ड्रोन 'क्वाडकोप्टर डीजेआई मेट्रिस 300 आरटीके सीरिज' के रहे हैं। 

ड्रोन का फ्लाइंग टाइम और भार सहने की क्षमता पर कीमत तय होती है। सुरक्षा बलों की नजर से बचने के लिए इनकी तकनीक में कुछ बदलाव भी किया जाता है। कहीं पर ड्रोन की आवाज बंद कर दी जाती है तो कुछ ड्रोन की सिग्नल लाइट को हटा दिया जाता है। पंजाब से लगते भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर घने कोहरे के दौरान दर्जनों ड्रोन आते हैं। ऐसे में ड्रोन की ऊंचाई ज्यादा रखी जाती थी। आवाज और ब्लिंकर को भी कंट्रोल किया जाता है। बीएसएफ ने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में जो ड्रोन गिराए हैं, उनकी लंबाई छह फुट तक रही है। कुछ ड्रोन तो 25 हजार एमएच की बैटरी वाले भी मिले हैं। ऐसे ड्रोन की मदद से 20-25 किलोग्राम सामान कहीं पर पहुंचाया जा सकता है। 

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पिछले साल भारत का पहला 'एंटी ड्रोन गश्ती वाहन' हैदराबाद में लांच किया गया है। यह वाहन 'पारंपरिक वाहन-आधारित प्रणालियों' के विपरीत है। इस वाहन को रक्षा के एक प्वाइंट से दूसरे प्वाइंट तक त्वरित गति से ले जाया जा सकता है। एंटी-ड्रोन गश्ती वाहन, चलते समय ड्रोन के खतरों का सक्रिय रूप से मुकाबला करता है। गाड़ी पर लगा यह सिस्टम 10 किलोमीटर के क्षेत्र में ड्रोन को डिटेक्ट करेगा। पांच किलोमीटर के दायरे में ड्रोन का सायबर टेकओवर होगा। तीन किलोमीटर में क्षेत्र में ड्रोन को जाम यानी सॉफ्ट किल कर दिया जाएगा। दो किमी के दायरे में 'एंटी-ड्रोन पेट्रोल व्हीकल' पर लगे सिस्टम से इंटरसेप्टर ड्रोन लांच होगा, जो दुश्मन के ड्रोन को मार गिराएगा। 

पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सर्विलांस के लिए बीएसएफ द्वारा 'सीआईबीएमएस' का सफल ट्रायल किया गया है। ड्रोन का पता लगाने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम 'एडीएस' लगे वाहनों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इस सिस्टम की मदद से भारतीय सीमा में रात को या धुंध के दौरान आने वाले ड्रोन का भी पता लगाया जा सकता है। बीएसएफ के पास इस्राइल में निर्मित 21 'लांग रेंज रीकानिसन्स एंड ऑब्जरवेशन सिस्टम' (लोरोस) हैं। इसके जरिए दिन में 12 किलोमीटर दूर से किसी मानव का पता लगाया जाता है। अब बीस किलोमीटर की रेंज वाले 'लोरोस या एचएचटीआई' खरीदने की तैयारी हो रही है। पिछले साल बीएसएफ को 546 'एचएचटीआई' (अनकूल्ड) लांग रेंज वर्जन कैमरे, 878 'एचएचटीआई' कैमरे, जिनमें 842 (अनकूल्ड) और 36 (कूल्ड) कैमरे खरीदने की प्रक्रिया शुरु हुई थी।
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